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“ग्राम धुम्माडांड़ में मानवता की मिसाल: कुएं में गिरे बैल को ग्रामीणों ने बचाया, गौ संरक्षण संगठनों की निष्क्रियता पर उठे सवाल”…………..

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समाचार (निलेश सोनी)……..

रात 8 बजे हुई घटना, 20-25 ग्रामीणों ने एक घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद सुरक्षित निकाला बैल

जनपद पंचायत सोनहत के ग्रामीण अंचलों में जहां एक ओर मानवता और सहयोग की मिसाल देखने को मिल रही है,

वहीं दूसरी ओर गौ संरक्षण से जुड़े संगठनों की जमीनी सक्रियता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो रहे हैं। ?

ताजा मामला ग्राम धुम्माडांड़ का है, जहां बीती रात लगभग 8 बजे एक बैल अचानक एक गहरे कुएं में गिर गया।

घटना की जानकारी मिलते ही गांव में अफरा-तफरी मच गई, लेकिन स्थानीय ग्रामीणों ने बिना समय गंवाए साहस और एकजुटता का परिचय दिया।

करीब 20-25 ग्रामीणों ने मिलकर रस्सियों और पारंपरिक संसाधनों की मदद से लगभग एक घंटे तक लगातार प्रयास किया और अंततः बैल को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

इस दौरान किसी भी प्रकार की सरकारी या संगठित गौ-रक्षा दल की सहायता मौके पर उपलब्ध नहीं हो सकी।

ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल और गौ रक्षा से जुड़े अन्य संगठनों की सक्रियता कागजों तक सीमित नजर आती है।

गांव-गांव तक इन संगठनों की पहुंच और त्वरित सहायता की कमी इस घटना में साफ तौर पर देखने को मिली।

यदि ग्रामीण स्वयं आगे नहीं आते, तो पशु की जान बचाना मुश्किल हो सकता था।

यह घटना न केवल ग्रामीण एकता और मानवता का उदाहरण प्रस्तुत करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि गौ संरक्षण के दावे करने वाले संगठनों को जमीनी स्तर पर अपनी भूमिका और जिम्मेदारी को और अधिक मजबूत करने की आवश्यकता है।

ग्रामीण क्षेत्रों में आपातकालीन पशु बचाव व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए प्रशासन और सामाजिक संगठनों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं में समय रहते प्रभावी सहायता मिल सके।

(रिपोर्ट: विशेष संवाददाता)

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