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“सामुदायिक भवन खंडहर, 14वें–15वें वित्त की राशि गायब? चितरांव पंचायत में विकास पर गंभीर सवाल”…………

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📍 विशेष रिपोर्ट | बेनी माधव कुशवाहा जिला रिपोर्टर
जयसिंहनगर, जिला शहडोल
(मध्य प्रदेश)

2015 में बना भवन बेकार पड़ा, न उपयोग न रखरखाव—ग्रामीणों ने सचिव-सर्पंच पर लगाए लापरवाही और भेदभाव के आरोप

जनपद पंचायत जयसिंहनगर के अंतर्गत ग्राम पंचायत चितरांव में वर्ष 2015 में लाखों रुपये की लागत से निर्मित सामुदायिक भवन आज जर्जर होकर खंडहर में तब्दील होता जा रहा है।

जिस भवन को गांव के सामाजिक, सांस्कृतिक और प्रशासनिक गतिविधियों का केंद्र बनना था, वह आज पूरी तरह उपेक्षा का शिकार है।

ग्रामीणों और स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, इस भवन का वर्षों से किसी भी प्रकार के कार्य—चाहे वह पंचायत बैठक हो या सामाजिक आयोजन—के लिए उपयोग नहीं किया जा रहा है।

भवन के दरवाजे बंद पड़े रहते हैं और उसकी स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है।

ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि पंचायत के सचिव और सरपंच द्वारा इस भवन की देखरेख नहीं की जा रही है।

इतना ही नहीं, पंचायत प्रतिनिधि इस ओर ध्यान देने तक नहीं आते, जिससे सरकारी संपत्ति बर्बादी के कगार पर पहुंच गई है।

14वें और 15वें वित्त आयोग की राशि पर उठे सवाल
मामले को और गंभीर बनाते हुए ग्रामीणों ने यह भी सवाल उठाया है कि पंचायत को मिलने वाली 14वें वित्त आयोग और 15वें वित्त आयोग की राशि आखिर कहां खर्च की गई।

साथ ही मूलभूत (बेसिक) विकास मद की राशि का उपयोग भी गांव में कहीं नजर नहीं आ रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि अगर इन फंडों का सही उपयोग हुआ होता, तो सामुदायिक भवन की मरम्मत, रखरखाव और गांव की अन्य मूलभूत सुविधाएं बेहतर स्थिति में होतीं।

लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल विपरीत है।

भेदभाव के आरोप भी आए सामने
गांव के कई लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि पंचायत सचिव द्वारा भेदभावपूर्ण रवैया अपनाया जा रहा है

, जिसके कारण सभी ग्रामीणों को योजनाओं का समान लाभ नहीं मिल पा रहा है।

इससे गांव में असंतोष का माहौल बनता जा रहा है।

जांच और कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों ने इस जा कड़ी साथ ही पंचायत कल्याण मंत्री और स्थानीय विधायक से हस्तक्षेप कर न केवल सामुदायिक भवन को पुनः उपयोग में लाने, बल्कि वित्तीय अनियमितताओं की जांच कराने की अपील की है।

अब सवाल यह है:
क्या शासन-प्रशासन इस गंभीर लापरवाही और संभावित वित्तीय गड़बड़ी पर संज्ञान लेगा, या चितरांव का यह सामुदायिक भवन यूं ही भ्रष्टाचार और उदासीनता की निशानी बना रहेगा?

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