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“ग्रामीण जागरूकता की मिसाल: युवाओं ने श्रमदान से संवारा प्राचीन ‘अंधारी ढोढ़ी’, विरासत संरक्षण का लिया संकल्प”……..

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📍 रिपोर्ट: निलेश सोनी……..

सलगावां कला | 12 अप्रैल 2026

ग्रामीण भारत में सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में एक प्रेरणादायक पहल सामने आई है।

ग्राम पंचायत सलगावां कला में स्थानीय युवाओं और ग्रामीणों ने एकजुट होकर प्राचीन पुरातात्विक स्थल ‘अंधारी ढोढ़ी’ की साफ-सफाई कर उसे नया जीवन देने का सराहनीय कार्य किया।

लंबे समय से उपेक्षा का शिकार इस ऐतिहासिक स्थल के आसपास गंदगी का अंबार लग चुका था और ढोढ़ी के भीतर मलबा व गंदा पानी जमा हो गया था।

ऐसे में उपसरपंच आशीष जायसवाल के नेतृत्व में शुरू किए गए स्वच्छता अभियान ने पूरे गांव में जागरूकता की नई लहर पैदा कर दी। ग्रामीणों ने श्रमदान करते हुए झाड़ियों की सफाई की, कचरा हटाया और ढोढ़ी के भीतर जमा मलबे को पूरी तरह बाहर निकालकर उसकी गहराई से सफाई की।

युवाओं की अहम भूमिका
इस अभियान में पंचायत प्रतिनिधियों के साथ-साथ युवाओं की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली।

पंच केपी सिंह, पंच प्रतिनिधि मिथिलेश राजवाड़े सहित प्रियांशु, अमर साय, अनीश, छोटे, कुलदीप शर्मा, अनमोल, हरवेन्द्र, आदित्य, राजेंद्र, राजेश, अशोक, अर्जुन, विनय और प्रकाश समेत बड़ी संख्या में युवाओं ने श्रमदान कर इस कार्य को सफल बनाया।

विरासत संरक्षण का संदेश
उपसरपंच आशीष जायसवाल ने कहा कि “अंधारी ढोढ़ी हमारे गांव की ऐतिहासिक पहचान है।

इसे स्वच्छ और सुरक्षित रखना हम सभी की जिम्मेदारी है।” ग्रामीणों ने प्रशासन से इस स्थल के स्थायी संरक्षण और सुंदरीकरण के लिए आवश्यक योजनाएं शुरू करने की मांग भी की है।

राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में पहल
यह पहल न केवल स्थानीय स्तर पर स्वच्छता और जागरूकता का उदाहरण है, बल्कि देशभर के ग्रामीण क्षेत्रों के लिए एक प्रेरणा भी है कि सामूहिक प्रयासों से ऐतिहासिक धरोहरों को संरक्षित किया जा सकता है।

👉 सलगावां कला की यह पहल दिखाती है कि जब युवा आगे आते हैं, तो बदलाव निश्चित होता है।

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