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“कोरिया वन मंडल में आदेशों की अवहेलना: तबादले के बाद भी रेंजर जमे, ‘मार्च क्लोजिंग’ बना ढाल—प्रशासनिक अनुशासन पर बड़ा सवाल”………..

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रिपोर्ट:
Nilesh Sony……..

एक महीने बाद भी प्रभार नहीं सौंपा, विभागीय निर्देशों की खुलेआम अनदेखी—उच्च स्तर पर शिकायत और कार्रवाई की तैयारी

रिपोर्ट:
छत्तीसगढ़ के कोरिया वन मंडल से प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है।

विभाग द्वारा रेंजरों के तबादले किए जाने के एक महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद कई रेंजर अब तक अपने पदों पर जमे हुए हैं और न तो उन्होंने पद छोड़ा है और न ही नए अधिकारियों को प्रभार सौंपा है।

सूत्रों के अनुसार, संबंधित अधिकारी “मार्च क्लोजिंग” का हवाला देकर आदेशों के पालन से बचते नजर आ रहे हैं,

जिससे यह स्पष्ट होता है कि विभागीय निर्देशों का जमीनी स्तर पर पालन लगभग शून्य है। इस स्थिति ने वन प्रशासन की कार्यप्रणाली और अनुशासन पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

प्रशासनिक दृष्टिकोण से यह मामला केवल लापरवाही नहीं, बल्कि आदेशों की खुली अवहेलना माना जा रहा है।

यदि समय रहते प्रभार हस्तांतरण नहीं होता है, तो इससे विभागीय कार्य प्रभावित होने के साथ-साथ शासन की साख पर भी असर पड़ सकता है।

स्थानीय स्तर पर इस पूरे मामले को लेकर असंतोष बढ़ता जा रहा है। विश्वसनीय सूत्रों का कहना है कि जल्द ही इसकी शिकायत उच्च अधिकारियों से की जाएगी और प्रभार सौंपने में देरी करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग उठेगी।

निष्कर्ष:
यह मामला केवल कोरिया वन मंडल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे तंत्र में जवाबदेही और अनुशासन की स्थिति को उजागर करता है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस गंभीर विषय पर क्या रुख अपनाता है और क्या दोषियों पर कार्रवाई होती है या नहीं।

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