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“महुआ बीनने की आड़ में जंगलों को आग: सोनहत वन परिक्षेत्र में वन संपदा पर मंडरा रहा बड़ा खतरा, जिम्मेदारों की भूमिका पर सवाल”……………

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(रिपोर्ट नीलेश सोनी……

📍 सोनहत /काछाडी बीट

हेडलाइन………..

“सड़क किनारे धधकती आग से नष्ट हो रहे पुराने पेड़, नए पौधों का विकास ठप—
रेंजर और बीट प्रभारी की सक्रियता पर उठे गंभीर प्रश्न”

सोनहत वन परिक्षेत्र के बीट कछाडी सोनहत और छतरंग रोड क्षेत्र में इन दिनों जंगलों में लगातार लग रही आग ने वन संपदा को गहरे संकट में डाल दिया है।

सड़क किनारे तक फैल चुकी यह आग न केवल हरियाली को निगल रही है, बल्कि पर्यावरण संतुलन पर भी गंभीर खतरा पैदा कर रही है।

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, महुआ बीनने के दौरान ग्रामीणों द्वारा जानबूझकर जंगलों में आग लगा दी जाती है,

ताकि महुआ इकट्ठा करना आसान हो सके। लेकिन यह लापरवाही अब विनाशकारी रूप ले चुकी है।

आग की चपेट में आकर वर्षों पुराने पेड़ जलकर राख हो रहे हैं, वहीं नए पौधों का विकास भी पूरी तरह बाधित हो रहा है।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए वन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं।


क्षेत्र में पदस्थ रेंजर और बीट प्रभारी की मौजूदगी और उनकी निगरानी को लेकर स्थानीय लोगों में असंतोष है।

सवाल यह है कि क्या जिम्मेदार अधिकारी अपने कर्तव्यों का सही तरीके से निर्वहन कर रहे हैं या नहीं?

जंगलों में लगातार लग रही आग यह दर्शाती है कि क्षेत्र में प्रभावी निगरानी और गश्त का अभाव है।

यदि समय रहते इस पर नियंत्रण नहीं पाया गया, तो आने वाले समय में यह क्षेत्र बंजर होने की कगार पर पहुंच सकता है।

पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं न केवल जैव विविधता को नुकसान पहुंचाती हैं, बल्कि वन्यजीवों के अस्तित्व पर भी खतरा बनती हैं।

अब देखना यह होगा कि वन विभाग इस गंभीर मुद्दे को संज्ञान में लेकर क्या ठोस कार्रवाई करता है, या फिर जंगल यूं ही आग की भेंट चढ़ते रहेंगे।

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