हमारे भारत वर्ष में जब ये कानुन बनाया गया था जो कि अस्थाई रूप से कमजोर लोगों के आर्थिक स्थिती के लिए बनाया गया था। जिस एक्ट की समय सीमा 10 वर्ष के लिए थी पर आज वहीं एक्ट लोंगो के शोषण का धंधा बन गया है। जो कि स्थाई रूप से बन कर रह गया , जनगणना के हिसाब सेst.sc के लोग समय को देखते हुये इस समाज में कोई भी आर्थिक स्थिति से आज कमजोर नहीं है। जहां भी देखा जाये ऊँचे -उँचे पदों पदस्थ है। अब भारत सरकार को समय को देखते हुए इस आरक्षण को खत्म करना होगा इस आधार पर दिया जाये जो व्यक्ति इस लायक हो जैसंे – अपने परिवार से जो विक्लांग हो व विधवा हो या जिसके पास घर मकान व खेती न हो ऐसे लोगांे को भारत सरकार को आरक्षरण देना चाहिए । पर देखने में मिलता है कि सामान्य वर्ग की सीट परst.sc के लोग ने कब्जा कर ये लोग उस वक्त आरक्षण नहीं देखते है, ऐसे लोग पुरा -पुरा आरक्षण का फायदा उठा रहें हैै । ऐसी स्थिति में न्यायालय इस षोषणष्के कारोबार को संज्ञान में ले आरक्षण समाज के गरीब परिवारों को देना उचित होगा आज का समय देखते हुए जाति का आरक्षण हजारों परिवारों की बलि दे चुका है। बहुत से परिवारों का नामों निषान मिट चुका है।

