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कोरिया वन मंडल के देवगढ़ सर्किल में करोड़ों की हरित योजना राख—जवाबदेही से बचता प्रशासन, कार्रवाई की मांग तेज
कोरिया/बैकुंठपुर।
वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की महत्वाकांक्षी मध्य कैंपा योजना एक बार फिर सवालों के घेरे में है।
कोरिया वन मंडल के बैकुंठपुर वन परिक्षेत्र अंतर्गत देवगढ़ सर्किल के कटगोड़ी पश्चिम परिसर (दामुज) में वर्ष 2023-24 में किए गए 20 हेक्टेयर क्षेत्र में 8000 बांस पौधों का वृक्षारोपण पूरी तरह नष्ट हो गया है।
सूत्रों के अनुसार, यह पूरा रोपण क्षेत्र आग की चपेट में आकर जलकर राख हो गया, जिससे शासन को भारी आर्थिक नुकसान के साथ-साथ पर्यावरणीय क्षति भी हुई है।
हैरानी की बात यह है कि जिस योजना का उद्देश्य हरित आवरण बढ़ाना और जलवायु संतुलन बनाए रखना था, वही अब विभागीय लापरवाही और निगरानी की कमी का उदाहरण बन गई है।

🔴 विभागीय लापरवाही पर सवाल
स्थानीय स्तर पर वन प्रबंधन समिति दामुज के अंतर्गत किए गए इस रोपण में 8000 गड्ढे और 8000 पौधे लगाए गए थे, लेकिन समय पर देखरेख, सुरक्षा और अग्नि नियंत्रण के उपायों के अभाव में पूरा क्षेत्र नष्ट हो गया।
प्रश्न यह उठता है कि:
क्या फायर लाइन बनाई गई थी?
क्या नियमित निगरानी हो रही थी?
आग लगने के बाद त्वरित कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
जवाबदेही से बचाव
घटना के बाद अब तक किसी भी जिम्मेदार अधिकारी या कर्मचारी पर ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। प्रशासनिक स्तर पर चुप्पी इस पूरे मामले को और संदिग्ध बना रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं केवल प्राकृतिक नहीं होतीं,
बल्कि इनमें मानवीय लापरवाही या मिलीभगत की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।




🔵 राजनीतिक सवाल: विकास या दिखावा?
यह मामला अब राजनीतिक रंग भी लेता जा रहा है। विपक्षी दलों का आरोप है कि:
> “सरकार की योजनाएं सिर्फ कागजों में हरियाली दिखाने तक सीमित हैं, जमीनी स्तर पर भ्रष्टाचार और लापरवाही हावी है।”
⚫ पर्यावरण पर गहरा असर
बांस जैसे तेजी से बढ़ने वाले पौधों का नष्ट होना न केवल आर्थिक नुकसान है,
बल्कि स्थानीय जैव विविधता और पर्यावरण संतुलन के लिए भी गंभीर खतरा है।
स्थानीय ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि:
पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच हो
दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए
भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस योजना बनाई जाए
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मध्य कैंपा योजना के तहत किया गया यह वृक्षारोपण अब सवाल बनकर खड़ा है—
क्या सरकारी योजनाएं सिर्फ कागजी उपलब्धि बनकर रह जाएंगी, या वास्तव में धरातल पर हरियाली लौटेगी?

