📝 *खबर (निलेश सोनी):
‘📍 स्थान: ग्राम पंचायत काटगोड़ी,
केंद्र सरकार के महत्वाकांक्षी ‘जल जीवन मिशन’ (JJM) का उद्देश्य 2024 तक देश के हर ग्रामीण घर तक नल से जल पहुंचाना था,?
लेकिन जमीन पर हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।
ग्राम पंचायत कटगोड़ी में बनी पानी की टंकी पिछले कई सालों से एक सफेद हाथी बनकर खड़ी है। ?
इस टंकी में एक बूंद भी पानी नहीं आया है, जिससे पूरे ग्रामवासी गहरे संकट और आक्रोश में हैं। ?
💧 ग्रामीणों का दुखड़ा: “हमें पीने के पानी के लिए तरसना पड़ता है” ?

कटगोड़ी के ग्रामीण इस गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं। ?
* पीने के पानी का संकट: ग्रामीणों को मीलों दूर से पानी लाना पड़ता है या उन्हें दूषित जल स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ता है, ?
जिससे जल-जनित बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है।
* सरकारी उपेक्षा: स्थानीय लोगों ने बार-बार जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को अपनी समस्या से अवगत कराया, लेकिन हर बार उन्हें केवल आश्वासन ही मिला। ?
* आक्रोश: एक ग्रामीण, महेश गुप्ता श्रीमती सीता देवी ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा, “जब पानी की टंकी बनकर खड़ी है, तो हमें क्यों पानी के लिए तरसना पड़ रहा है?
यह हमारे साथ किया गया सबसे बड़ा मज़ाक है।” ?
🚧 सवाल विकास के मॉडल पर
यह घटना केवल कटगोड़ी की नहीं, बल्कि देश के उन सैकड़ों ग्रामीण क्षेत्रों की कहानी है,?
जहां सरकारी योजनाएं कागजों पर तो सफल दिखती हैं, लेकिन क्रियान्वयन के अभाव में धूल फांक रही हैं। ?
* जवाबदेही का अभाव: JJM के तहत बनी इस महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे के सालों से अप्रयुक्त रहने पर स्थानीय प्रशासन और संबंधित ठेकेदारों की जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं।
* हमारी मांग: कागोड़ी के ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल इस मामले का संज्ञान लेने, टंकी में पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करे! ।
> “जल जीवन मिशन का नारा ‘हर घर जल’ है, लेकिन काटगोड़ी में हकीकत ‘हर घर प्यास’ है।”
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यहखबर जल सुरक्षा और ग्रामीण विकास के दावों की पोल खोलती है।?
ग्राम पंचायत कटगोड़ी
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