📝 *खबर (निलेश सोनी):
हेडलाइन…...
“हर घर जल योजना फेल?
जल संकट पर बड़ा खुलासा
जल जीवन मिशन के तहत हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने का दावा भले ही किया जा रहा हो, लेकिन कोरिया जिले के सोनहत क्षेत्र में हकीकत इससे बिल्कुल उलट नजर आ रही है।
सोनहत का कोरिया नीर, जो दशकों पहले ग्रामीणों के लिए शुद्ध और मीठे पानी का मुख्य स्रोत हुआ करता था, आज पूरी तरह से खराब और उपेक्षित पड़ा हुआ है।

हालात इतने बदतर हैं कि गर्मी के मौसम में भी इसे बंद रखा जाता है, जिससे गांव के लोगों को पीने के पानी के लिए दूर-दराज़ इलाकों में भटकना पड़ता है।
⚠️ ग्रामीणों का दर्द
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि:
👉 “पहले यही कोरिया नीर हमारी प्यास बुझाता था, लेकिन अब सालों से बंद पड़ा है।”
👉 “गर्मी में हालात और बिगड़ जाते हैं, फिर भी कोई सुनवाई नहीं होती।”
🏛️ पंचायत का जवाब—जिम्मेदारी से बचाव?
यह बयान खुद इस बात की ओर इशारा करता है कि समस्या की गंभीरता के बावजूद कोई ठोस पहल नहीं की जा रही है।
🔎 बड़े सवाल
क्या जल जीवन मिशन सिर्फ कागजों तक सीमित है?
वर्षों से बंद पड़े जल स्रोत की मरम्मत क्यों नहीं हुई?
ग्रामीणों को मूलभूत सुविधा के लिए क्यों भटकना पड़ रहा है?
क्या प्रशासन और जनप्रतिनिधि इस पर जवाबदेही लेंगे?
📢 मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि
:
✅ कोरिया नीर की तत्काल मरम्मत की जाए
✅ जल जीवन मिशन के कार्यों की जांच कराई जाए
“जब पानी जैसी बुनियादी जरूरत भी पूरी न हो पाए, तो विकास के दावे खोखले नजर आते हैं।”
सोनहत का कोरिया नीर आज सिर्फ एक जल स्रोत नहीं, बल्कि सरकारी योजनाओं की विफलता का प्रतीक बन चुका है।

