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“PMGSY में 36 लाख का ‘मेंटेनेंस घोटाला’? सोनहत कछाडी मार्ग पर घटिया निर्माण से उठे बड़े सवाल”……………

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📝 *खबर (निलेश सोनी):

🟥 हेडलाइन………….

📍 सोनहत/रामगढ़ | विशेष रिपोर्ट

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत सोनहत–रामगढ़ मुख्य मार्ग से कचहरी तक बनाए जा रहे मेंटेनेंस कार्य में भारी अनियमितताओं और घटिया निर्माण की शिकायतें सामने आई हैं।

लगभग 36 लाख रुपये की लागत से हो रहे इस कार्य में गुणवत्ता को लेकर स्थानीय ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क किनारे बनाए जा रहे रिटर्निंग वॉल (Retaining Wall) में तय मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है।

निर्माण कार्य में बेस (नींव) को पर्याप्त गहराई तक नहीं खोदा गया, वहीं मटेरियल भी निर्धारित स्टैंडर्ड के अनुसार उपयोग नहीं किया जा रहा है।

कई स्थानों पर अत्यधिक मात्रा में मशीनों का उपयोग कर जल्दबाजी में कार्य पूरा किया जा रहा है, जिससे गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।

स्थानीय लोगों ने बताया कि यह सड़क लगभग 10 वर्ष पहले बनाई गई थी, लेकिन निर्माण के कुछ ही महीनों बाद सड़क की परत उखड़ने लगी थी और जगह-जगह गड्ढे बन गए थे।


उस समय भी निर्माण कार्य को लेकर विवाद और शिकायतें सामने आई थीं, लेकिन मामले को दबा दिया गया।

अब एक बार फिर उसी सड़क पर मेंटेनेंस कार्य के नाम पर बड़ी राशि खर्च की जा रही है, लेकिन हालात पहले जैसे ही नजर आ रहे हैं।

इससे ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। लोगों का कहना है कि सूचना बोर्ड में भी अधूरी जानकारी दी गई है, जिससे कार्य की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

वहीं, PMGSY के संबंधित SDO से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने न तो फोन उठाया और न ही इस मामले में कोई प्रतिक्रिया दी।

इससे विभागीय जवाबदेही पर भी प्रश्नचिह्न लग रहा है।

ग्रामीणों और क्षेत्रीय लोगों ने आरोप लगाया है कि ठेकेदार द्वारा मनमानी की जा रही है और ऊपरी पहुंच का हवाला देकर दबाव बनाया जा रहा है। यहां तक कि पत्रकारों के साथ भी अभद्र व्यवहार किए जाने की बात सामने आई है।

मांग:
स्थानीय ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने, दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करने और निर्माण कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित करने की मांग की है।

👉 निष्कर्ष:
सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं में यदि इस तरह की लापरवाही और भ्रष्टाचार जारी रहा, तो ग्रामीण विकास के दावे सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह जाएंगे।

सोनहत का यह मामला प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है।

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