📝 *खबर (निलेश सोनी):
बेपरवाही की हद: लाखों की लागत से बना शौचालय देखरेख के अभाव में खंडहर! ?
सामुदायिक शौचालय ग्राम पंचायत चकडड
‘स्वच्छ भारत’ पर बदनुमा दाग! लाखों खर्च, फिर भी ग्राम पंचायत चकडड का सामुदायिक शौचालय जर्जर, ग्रामीण खुले में शौच को मजबूर?
बेपरवाही की हद: लाखों की लागत से बना शौचालय देखरेख के अभाव में खंडहर! ?
ग्राम पंचायत चकडड, [ज़िल कोरिया]। ‘स्वच्छ भारत मिशन’ के तहत ग्राम पंचायत चकडड में निर्मित सामुदायिक शौचालय (Community Toilet) आज खुद बदहाली का शिकार है। ?
लाखों रुपए खर्च कर बनाया गया यह सार्वजनिक सुविधा केंद्र अब पूरी तरह से जर्जर और खस्ता हाल हो चुका है, ?
जिसके कारण गांव के लोगों को मजबूरी में खुले में शौच के लिए जाना पड़ रहा है।


यह स्थिति सरकारी योजनाओं के प्रति स्थानीय प्रशासन की घोर लापरवाही और उदासीनता को दर्शाती है। ?
ग्रामीणों का फूटा गुस्सा:?
गांव वालों ने दुख और आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि, “शौचालय बनने के कुछ ही समय बाद से इसकी देखरेख बंद हो गई।
दरवाजे टूटे हुए हैं, छत से पानी टपकता है और अंदर गंदगी का अंबार है। बदबू के कारण इसके पास खड़े होना भी मुश्किल है।”?
विशेषकर महिलाओं और बुजुर्गों को सबसे अधिक परेशानी झेलनी पड़ रही है, क्योंकि सार्वजनिक सुविधा के अभाव में उन्हें असुविधाजनक और असुरक्षित स्थानों का सहारा लेना पड़ रहा है।?


> 📢 “सरकार ने हमें शौचालय दिया, पर उसकी देखभाल की जिम्मेदारी कौन लेगा? हमारे लाखों रुपए बर्बाद हो गए और हमें आज भी खुले में शौच जाना पड़ रहा है। यह हमारे साथ घोर अन्याय है!” – एक स्थानीय ग्रामीण।?
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जिम्मेदारकौन?
स्थानीय ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव इस मामले में चुप्पी साधे हुए हैं।
यह सवाल उठता है कि जब सरकार खुले में शौच मुक्त (ODF) समाज बनाने के लिए करोड़ों रुपए खर्च कर रही है, तो क्यों कुछ लापरवाह अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की वजह से ये योजनाएँ ज़मीन पर दम तोड़ रही हैं?
यह केवल धन की बर्बादी नहीं, बल्कि ग्रामीणों के स्वास्थ्य और सम्मान के साथ भी खिलवाड़ है। ?
हमारी मांग:
स्थानीय प्रशासन और ज़िलाधिकारी को इस मामले का तत्काल संज्ञान लेना चाहिए।
जर्जर सामुदायिक शौचालय की तुरंत मरम्मत कराई जाए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही न हो।??

