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डिजिटल इंडिया की विडंबना: ग्राम पंचायतों में जर्जर दूरसंचार , कनेक्टिविटी का घोर संकट. ?………….

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📝 *खबर (निलेश सोनी)…..

निष्क्रिय टॉवर, ग्रामीण भारत की डिजिटल भागीदारी पर प्रश्नचिह्न. ?

[ग्राम पंचायत उज्ञाव],
[जिला कोरिया],

डिजिटल इंडिया के स्वप्न को साकार करने की राष्ट्रीय महत्वाकांक्षा के मध्य, देश के ग्रामीण अंचल एक अभूतपूर्व कनेक्टिविटी संकट से जूझ रहे हैं। ?

यह स्थिति उस आधारभूत अवसंरचना की दयनीय उपेक्षा का प्रत्यक्ष प्रमाण है ?
जिस पर ग्रामीण अर्थव्यवस्था और शासन की नींव टिकी है। ?

प्राप्त जानकारी के अनुसार, [ग्राम पंचायत का उज्ञाव] में स्थापित दूरसंचार टॉवर, जिओ आइडिया बीएसएनल जो कि डिजिटल समावेशन का एक प्रमुख स्तंभ होना चाहिए था ?

कई वर्षों से निष्क्रिय अवस्था में है। ?

यह केवल एक स्थानीय विसंगति नहीं, बल्कि देश भर की असंख्य ग्राम पंचायतों में व्याप्त ढाँचागत अक्षमता का प्रतीकात्मक दृष्टांत है। ?

तकनीकी विफलता और प्रशासनिक उदासीनता
स्थानीय निवासियों और पंचायत प्रतिनिधियों द्वारा बारंबार संज्ञान लेने हेतु अभ्यावेदन दिए जाने के बावजूद, संबंधित दूरसंचार प्रदाताओं और सरकारी नियामक निकायों की ओर से कोई ठोस पहल परिलक्षित नहीं हुई है। ?

टॉवर की यह दीर्घकालिक निष्क्रियता न केवल निवासियों को बेसिक फोन सेवाओं से वंचित करती है, बल्कि ऑनलाइन शिक्षा, डिजिटल बैंकिंग, सरकारी सेवाओं के उपयोग और ई-गवर्नेंस जैसी मूलभूत आवश्यकताओं के मार्ग में भी अवरोध उत्पन्न कर रही है। ?

एक ग्रामीण निवासी, श्री/ [बसंत लाल], ने और ग्रामवासी क्षेत्रवासी सुदामा सिंह अभिमन्यु सिंह जयराम सिंह टेकाम अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा,?

“हम सूचना प्रौद्योगिकी के इस युग में भी, आपात स्थिति में एक फोन कॉल करने के लिए किलोमीटरों की दूरी तय करने के लिए विवश हैं। ?

नेटवर्क विहीनता के व्यापक सामाजिक-आर्थिक निहितार्थ ?

इस नेटवर्क विहीनता
(Digital Blackout) के सामाजिक-आर्थिक निहितार्थ अत्यंत गंभीर हैं। ?

कनेक्टिविटी की कमी के कारण: ?

* शिक्षा: छात्र ऑनलाइन कक्षाओं और डिजिटल अध्ययन सामग्री तक पहुँचने में असमर्थ हैं, ?

जिससे उनकी शैक्षिक प्रगति बाधित हो रही है। ?

* आर्थिक गतिविधि: छोटे व्यवसायों का डिजिटलीकरण रुक गया है, ?

और कृषि संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी तक पहुँच दुर्गम बनी हुई है। ?

* सुरक्षा और आपदा प्रबंधन: आपातकालीन संचार चैनल निष्प्रभावी हो जाते हैं।

यह स्थिति ग्रामीण भारत और केंद्रों के बीच डिजिटल डिवाइड की खाई को और भी गहरा कर रही है।?

यह विषय अब केवल एक तकनीकी त्रुटि का नहीं, बल्कि राष्ट्रीय नीति निर्माण और संसाधन आबंटन की प्राथमिकताओं पर पुनर्विचार का है। ?

आवश्यकता है कि संचार मंत्रालय
(
Ministry of Communications)
और भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) इस जर्जर अवसंरचना के व्यापक सर्वेक्षण का आदेश दें और जवाबदेही सुनिश्चित करें। ?

जब तक ग्राम पंचायतों में विश्वसनीय और निर्बाध कनेक्टिविटी सुनिश्चित नहीं की जाती, तब तक ‘सबका साथ, सबका विकास’ का संकल्प धरातल पर चरितार्थ होना असंभव प्रतीत होता है।?

यह निष्क्रिय टॉवर ग्रामीण आकांक्षाओं की उपेक्षा का एक खामोश स्मारक बन चुका है, ?

जिस पर तत्काल संज्ञान अपेक्षित है। ??

ग्राम पंचायत उज्ञाव/पश्चिम पारा रोड
खबर/जन-जन की आवाज

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