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“जल गंगा संवर्धन अभियान को मिली जनभागीदारी की नई धार: अमझोर में जागरूकता, स्वच्छता और जल संरक्षण का सशक्त संदेश”…………

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📰 हेडलाइन:

📝 *खबर (निलेश सोनी):

📍 *अमझोर, जिला शहडोल | दिनांक: 24 मार्च 2026 (मंगलवार)

अमझोर में जल गंगा अभियान: जनभागीदारी से जल संरक्षण का संकल्प

मध्यप्रदेश शासन के योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग अंतर्गत संचालित मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद, जिला शहडोल के निर्देशन में ग्राम अमझोर में जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत एक व्यापक जन-जागरूकता एवं सहभागिता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम का संचालन जिला समन्वयक श्री विवेक पाण्डेय एवं ब्लॉक समन्वयक श्री ऋत्विक दास मिश्रा के मार्गदर्शन में किया गया,

जिसमें प्रशासनिक दृष्टि से जल संरक्षण के विभिन्न आयामों को प्रभावी रूप से प्रस्तुत किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ माँ भारती एवं माँ वीणावादिनी (सरस्वती) के छायाचित्र पर दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ,

जिसके उपरांत सामूहिक कीर्तन के माध्यम से वातावरण को जागरूकता एवं सांस्कृतिक चेतना से ओतप्रोत किया गया।

इस अवसर पर उपस्थित जनसमूह को जल संरक्षण के प्रति संवेदनशील बनाते हुए “जल ही जीवन है” के मूल मंत्र को व्यवहार में उतारने पर विशेष बल दिया गया।

विशेषज्ञों एवं समन्वयकों द्वारा जल के सतत उपयोग, वर्षा जल संचयन, नदियों एवं जलाशयों के तटों की नियमित सफाई, तालाबों के संरक्षण, तथा सोख्ता गड्ढों के माध्यम से जल के भू-गर्भीय पुनर्भरण जैसे महत्वपूर्ण उपायों की विस्तृत जानकारी दी गई।

कार्यक्रम में यह भी स्पष्ट किया गया कि जल संरक्षण केवल सरकारी दायित्व नहीं, बल्कि सामूहिक जनभागीदारी का विषय है,

जिसमें प्रत्येक नागरिक की सक्रिय भूमिका आवश्यक है। इसी क्रम में उपस्थित ग्रामीणों को जल बचाने एवं पर्यावरण संरक्षण हेतु सामूहिक शपथ भी दिलाई गई।

कार्यक्रम में सेक्टर-01 के अंतर्गत नवांकुर संस्था के अध्यक्ष श्री पवन कुमार तिवारी, श्री शिव कुमार तिवारी, श्री सूरज त्रिपाठी, सीएमसीएलडीपी के विद्यार्थी, ग्राम अमझोर की मातृशक्ति, युवा वर्ग एवं नन्हें बच्चों की सक्रिय एवं उत्साहपूर्ण उपस्थिति रही, जिसे आयोजकों द्वारा सराहनीय बताया गया।

📊 प्रशासनिक दृष्टिकोण:
यह आयोजन राज्य शासन की जल संरक्षण नीति एवं जनभागीदारी आधारित विकास मॉडल का उत्कृष्ट उदाहरण है,

जो ग्रामीण स्तर पर जल प्रबंधन को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहा है।

ऐसे कार्यक्रम न केवल जागरूकता बढ़ाते हैं, बल्कि स्थानीय स्तर पर स्थायी समाधान विकसित करने की दिशा में भी मार्ग प्रशस्त करते हैं।

🔚 निष्कर्ष:
अमझोर में आयोजित यह कार्यक्रम जल संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता, सामाजिक सहभागिता और प्रशासनिक समन्वय का सशक्त उदाहरण बनकर उभरा है, जो राष्ट्रीय स्तर पर भी अनुकरणीय पहल के रूप में देखा जा सकता है।

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