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विकास के दावों की पोल खोलता अमझोर का बदहाल बस स्टैंड —जिला प्रशासन मौन *हादसे को न्योता देता रोड किनारे ठहराव………….

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निलेष सोनी

विकास के दावों की पोल खोलता अमझोर का बदहाल बस
स्टैंड —जिला प्रशासन मौन *हादसे को न्योता देता रोड किनारे ठहराव!

📍 ग्राम पंचायत अमझोर, जनपद पंचायत जयसिंहनगर, जिला शहडोल (मध्यप्रदेश)

जनपद पंचायत जयसिंहनगर अंतर्गत ग्राम पंचायत अमझोर में बस स्टैंड की दुर्दशा विकास के तमाम दावों पर करारा तमाचा साबित हो रही है।

गांव का बस ठहराव स्थल गंदगी, अव्यवस्था और लापरवाही का जीता-जागता उदाहरण बन चुका है।

यहां न तो कोई व्यवस्थित बस स्टेशन है और न ही यात्रियों के बैठने की समुचित व्यवस्था।

ग्रामीणों के अनुसार वर्षों से बस स्टेशन निर्माण की मांग शासन-प्रशासन के समक्ष रखी जाती रही है।

जलप्रपत्रिका एवं आवेदन के माध्यम से भी मांग की गई, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी।

परिणामस्वरूप आज भी बसें सड़क किनारे रुकती हैं, जिससे यात्रियों को चढ़ने-उतरने में भारी जोखिम उठाना पड़ता है।

❗ हादसे को खुला निमंत्रण

सड़क किनारे बसों का रुकना कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकता है।

स्कूली बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं जान जोखिम में डालकर आवागमन करने को मजबूर हैं।

यह स्थिति प्रशासनिक उदासीनता की पराकाष्ठा को दर्शाती है।

🗑️ गंदगी और बदइंतजामी का अड्डा

बस ठहराव स्थल पर चारों ओर फैली गंदगी, कचरे के ढेर और असुविधाएं इस क्षेत्र की उपेक्षा की कहानी बयां कर रही हैं।

स्वच्छता और मूलभूत सुविधाओं के बड़े-बड़े दावे यहां आकर दम तोड़ते नजर आते हैं।

⚠️ पिछड़े क्षेत्र की अनदेखी

अमझोर क्षेत्र पहले से ही विकास की मुख्यधारा से कोसों दूर माना जाता है।

ऐसे में बस स्टेशन जैसी बुनियादी सुविधा का अभाव स्थानीय प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि शीघ्र ही बस स्टेशन का निर्माण नहीं कराया गया तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।

🔴 अब सवाल यह उठता है कि क्या जिला प्रशासन किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहा है?

ग्राम पंचायत अमझोर की जनता जवाब मांग रही है — और जवाबदेही तय होना अब अनिवार्य हो गया है।

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