कोरबा। खरीफ विपणन वर्ष 2025–26 की धान खरीदी शुरू होने से ठीक एक दिन पहले राज्य शासन द्वारा धान खरीदी कार्य में लगे सभी कर्मचारियों पर ESMA लागू कर दिया गया, लेकिन इसके बावजूद जिले में हड़ताली कर्मचारियों और अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि वे अपने निर्णय से पीछे नहीं हटेंगे। इससे कोरबा जिले में वैकल्पिक व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं।
सहकारी समिति कर्मचारी बोले—हम शासन के कर्मचारी नहीं, ESMA लागू नहीं होता
सहकारी समिति कर्मचारी संघ के जिला अध्यक्ष विनोद भट्ट ने कहा कि सहकारी समितियों के कर्मचारी राज्य शासन के कर्मचारी नहीं हैं, इसलिए उन पर ESMA लागू नहीं होता। उन्होंने स्पष्ट किया कि कर्मचारी प्रदेशव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी रखेंगे। प्रदेशभर की 2,058 समितियों के लगभग 10,000 कर्मचारी शॉर्टेज, वेतन विसंगति और अन्य मांगों को लेकर 12 नवंबर से बेमियादी हड़ताल पर हैं।
कृषि अधिकारी संघ ने भी ड्यूटी अस्वीकार की
इधर छत्तीसगढ़ कृषि स्नातक शासकीय कृषि अधिकारी संघ के जिला अध्यक्ष संजय कुमार सोनवानी ने बताया कि कोरबा जिले के 49 RAEO और SADO को धान खरीदी केंद्रों पर प्रबंधक/नोडल/उपार्जन प्रभारी बनाया गया है, लेकिन वे इस दायित्व को स्वीकार नहीं करेंगे। उनका कहना है कि कृषि उत्पादन आयुक्त के पत्र में अधिकारियों को उपार्जन केंद्र में ड्यूटी न लगाने के निर्देश पहले ही दिए जा चुके हैं। इसके बावजूद ड्यूटी आदेश जारी करना अनुचित है।
कृषि अधिकारी वर्तमान में रबी फसल लक्ष्यों, बीज–उर्वरक वितरण, पीएम फसल बीमा, फसल कटाई प्रयोग, पीएम किसान सम्मान निधि, ई-KYC, भूमि सत्यापन, मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरण और एग्रीस्टेट पंजीयन जैसे समयबद्ध कार्यों में व्यस्त हैं, इसलिए अतिरिक्त दायित्व संभव नहीं है।
पंचायत सचिव संघ ने भी धान खरीदी का कार्यभार लेने से किया इनकार
प्रदेश पंचायत सचिव संघ ने भी पंचायत सचिवों को धान खरीदी से मुक्त रखने की मांग की है। संघ के अध्यक्ष उपेंद्र पैकरा ने बताया कि पंचायत सचिव पहले से 29 विभागों के कार्यों के साथ-साथ पीएम आवास योजना, धरती आबा योजना, मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) और कई अन्य परियोजनाओं में व्यस्त हैं। धान खरीदी का अतिरिक्त दायित्व मिलने से सभी कार्य बाधित होंगे।
सरकार ने सख्त रुख अपनाया, ESMA लागू
हड़ताल के बढ़ते प्रभाव और पदस्थ कर्मचारियों के कार्य से इंकार को देखते हुए गृह विभाग के उपसचिव रामप्रसाद चौहान ने 15 नवंबर से 31 जनवरी 2026 तक धान खरीदी से जुड़े सभी कर्मचारियों पर ESMA लागू करने का आदेश जारी किया। आदेश में कहा गया है कि लोकहित और धान खरीदी प्रक्रिया की निरंतरता के लिए यह कदम आवश्यक है। अब इस अवधि में धान खरीदी कार्य से इंकार करना कानूनी रूप से दंडनीय होगा।
स्थिति अब भी धुंधली—17 नवंबर पर टिकी निगाहें
शनिवार को धान खरीदी बंद रहती है, लेकिन शुरुआती दिन होने के कारण सोनपुरी और पाली उपार्जन केंद्रों में टोकन कटे। अब निगाहें सोमवार और 17 नवंबर पर टिक गई हैं, जब यह साफ होगा कि — हड़ताली कर्मचारी झुकेंगे या शासन कड़ा कदम और आगे बढ़ाएगा?



