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बैकुण्ठपुर/कोरिया : वन विभाग की जमीन पर असामाजिक तत्वों का कब्जा! — बैकुण्ठपुर में सरकारी क्वार्टर्स में दारू-गांजा का अड्डा, कर्मचारी भयभीत!……….

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बैकुण्ठपुर/कोरिया। जिला मुख्यालय बैकुण्ठपुर में वन विभाग की जमीन पर असामाजिक तत्वों का कब्जा लगातार बढ़ता जा रहा है। दशकों पुराने सरकारी वन विभाग के क्वार्टर्स, जहाँ पहले विभागीय कर्मचारी रहते थे, अब गैरकानूनी कब्जाधारियों के नियंत्रण में आ गए हैं। जानकारी के अनुसार, ये क्वार्टर्स सैकड़ों साल पुराने भवनों में बने हुए हैं, जिनमें पूर्व में वन विभाग के कर्मचारी और अधिकारी निवास करते थे। लेकिन कर्मचारियों के रिटायर होने या स्थानांतरण के बाद, कुछ लोगों ने मौके का फायदा उठाकर सरकारी मकानों की दीवारें तोड़ दीं और कब्जा जमाने की कोशिश शुरू कर दी।

कर्मचारियों को मिल रही धमकियाँ — “क्वार्टर खाली करो!”

सूत्रों के अनुसार, वर्तमान में जो कुछ कर्मचारी अब भी वहाँ रह रहे हैं, उन्हें धमकाया जा रहा है और क्वार्टर खाली करने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। बताया जा रहा है कि वन विभाग के उन क्वार्टर्स में अब दारू, शराब और गांजा बेचने वालों का जमावड़ा लग चुका है, जिससे आसपास के रहवासी परेशान हैं और वातावरण असुरक्षित हो गया है।

प्रशासन की ढिलाई से बढ़ा कब्जा — पुलिस लाइन और कॉलेज की जमीन भी विवादित!

स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन की लापरवाही और राजस्व विभाग की मिलीभगत के कारण यह कब्जा-खेल थमने का नाम नहीं ले रहा। बताया जा रहा है कि थाना प्रभारी और पुलिस लाइन के पीछे की जमीन तक को कुछ लोगों ने दूसरों की संपत्ति बताकर रजिस्ट्री करा ली! इसी प्रकार पीजी कॉलेज की जमीन का भी विवाद पुराना है, जिसमें राजस्व विभाग की त्रुटियों ने कब्जाधारियों को फायदा पहुंचाया है।

1947-48 के रिकॉर्ड से उठ रहा सच — जमीन दी गई, बेची गई या हड़पी गई?

वन विभाग के पुराने रिकॉर्ड के अनुसार, वर्ष 1947-48 में लगभग 5 एकड़ जमीन कुछ व्यक्तियों को दी गई थी, लेकिन अब यह स्पष्ट नहीं है कि वह जमीन कहां दी गई थी और कहां बेची गई। आज जो लोग दावा कर रहे हैं, उनके पूर्वजों को दी गई जमीन का कोई स्पष्ट रिकॉर्ड या दस्तावेज नहीं है। इसलिए इन दावों को अवैध माना जा रहा है।

जनता प्रशासन और राजस्व विभाग से यह सवाल पूछता है — आखिर वन विभाग की शासकीय जमीन पर कब्जा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई कब होगी? क्या 1947-48 के रिकॉर्ड को देखकर असली मालिकाना हक़ तय नहीं किया जा सकता?
👉 सरकारी जमीन पर शराब और गांजा के अड्डे चलाने वालों पर कब गिरेगी गाज?

अब जनता का सवाल है — क्या जिला प्रशासन इन असामाजिक तत्वों को बेदखल कर वन विभाग की जमीन वापस दिलाएगा, या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा? यह समाचार प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रकाशित किया जा रहा है।

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