छत्तीसगढ़ में फर्जी पत्रकारों का सम्मान और शासन की सुविधाओं का लाभ उठाने का मामला सामने आया है। यह सवाल उठता है कि क्या शासन और प्रशासन को इन फर्जी पत्रकारों की पहचान करने और उनके खिलाफ कार्रवाई करने की आवश्यकता नहीं है ?
छत्तीसगढ़ में कुछ लोग पत्रकारिता के नाम पर वसूली करते हैं। ये लोग अधिकारियों और मंत्रियों के सामने माइक लेकर फर्जी नाम से और वेब पोर्टल के नाम से विज्ञापन छपवाकर पैसा निकालते हैं। ये फर्जी पत्रकार राज्य शासन और प्रशासन के नाक के नीचे फर्जीवाड़ा चला रहे हैं। और भोली-भाली जनता इन्हें वरिष्ठ पत्रकार के नाम से संबोधित करती हैं यहां तक कि, ये लोग संगठन की आवश्यकता को भी पूरा करते हैं। देखा जा रहा है कि, एक ही व्यक्ति साल भर में कई फर्जी अखबार में मंत्रियों और अधिकारियों का विज्ञापन छपवाकर पैसा वसूलता है। कुछ लोग इन फर्जी पत्रकारों को जन्मदिन पर लंबी-लंबी बधाइयाँ भी देते हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, कोरिया जिले में एक नया संगठन का भी जन्म हो गया है। पर देखने व सोचने वाली बात है कि, पत्रकार लोग गुठ बनाकर पैसा वसूलने में सक्षम हो चुके है। यहां तक कि, पत्रकारिता की लाईन में कुछ महिलाऐं भी उस संगठन में सहभागिता दिखा रही है। और जिनका दामन साफ न हो वह भी अपने को चरित्रवान बतला रहे है। जैसे एक कहावत है “चलनी में 72 छेद”। उसी प्रकार पत्रकारिता में ज्यादातर दाग ही दाग नजर आते है। यहां तक कि, अपने चरित्र को भी बेच खाते है। अब पत्रकारिता एक सम्मान पर नही रह गया। जैसे अभी हाल ही में जयनगर में पुलिस वालों के कृत्यों को देखते हुए जो ग्रामीणों ने पुलिस वालों के साथ किया, वही हाल पत्रकारों के कृत्यों से सामने आने वाला है। यह समाचार आम जनता से प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रकाशित किया जा रहा है।


