मुख्यालय जशपुर ब्लॉक मनोरा के समीप लगभग 25 एकड़ जमीन वन विभाग की है, जिसके हरे-भरे पेड़ों को काटा दिया गया । गांव वालों ने इसकी शिकायत की, जिसके बाद शासन ने वन विभाग को आदेश दिया कि इनको जमीन से बेदखल किया जाए। इसके बावजूद भी लगभग 22 एकड़ जमीन में सब्जी और धान उगाया जा रहा है। इससे संबंधित सूत्र बताते हैं कि जशपुर प्रशासन पैसे के बल पर समझौता कर रहा है।

वहीं मनोरा जशपुर की एक महिला ने कलेक्टर को लिखित शिकायत की, जिसमें उसने वन विभाग के डीएफओ की लापरवाही और कमियों को उजागर किया। जिस पर आरोप है कि, कलेक्टर ने उस शिकायतकर्ता महिला को मौखिक रूप से धमकी देते हुए कहा कि “डीएफओ मेरा मित्र है और तुम मेरे मित्र की आलोचना कर रही हो। मैं तुम्हें नहीं छोड़ूंगा और तुम्हारे खिलाफ एक करोड़ रुपये का मानहानि का दावा करूंगा।” साथ ही, कलेक्टर ने महिला की बात सुनने से भी इनकार कर दिया।
उस शिकायतकर्ता महिला ने वशिष्ठ टाइम्स के संपादक को आज दिनांक 19/10/2025 को अपनी पूरी बात बताई, जिसे संपादक ने ध्यानपूर्वक सुना। इसके बाद संपादक ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री को इस मामले की जानकारी दी। जानकार सूत्रों के अनुसार, कलेक्टर पहले सूरजपुर में भी कलेक्टर पद पर रह चुके हैं और वहां की जनता उनके कार्यकाल से असंतुष्ट थी। और सूरजपुर में भी उनके खिलाफ कई शिकायतें की गई थीं।

छत्तीसगढ़ शासन के नियमों में महिलाओं को प्रताड़ित करने का अधिकार किसी को नहीं दिया गया है। यह बयान संदर्भ से बाहर लगता है और महिलाओं के अधिकारों के विरुद्ध है। लोगों का कहना है कि, जब कलेक्टर और डीएफओ मित्र हैं, तो उन्हें अपने पद से हटकर मित्रता निभानी चाहिए। छत्तीसगढ़ की जनता और जशपुर की जनता महिलाओं का अपमान बर्दाश्त नहीं करेगी। इस संबंध में राष्ट्रीय महिला आयोग दिल्ली, छत्तीसगढ़ महिला आयोग रायपुर और माननीय नरेन्द्र मोदी जी को पत्र लिखा गया है। क्या वन विभाग जंगल की सुरक्षा के लिए है या जंगल कटवाने के लिए ? आम जनता प्रशासन से जवाब चाहती है।




