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एमसीबी/CG : सुपोषण की ओर कदम : आंगनबाड़ी सेवाओं से कुपोषित शिवांश हुआ स्वस्थ…………

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समन्वित प्रयासों और संतुलित आहार से मिला कुपोषण पर विजय

एमसीबी : एकीकृत बाल विकास परियोजना मनेन्द्रगढ़ अंतर्गत ग्राम पंचायत चैनपुर के आंगनबाड़ी केन्द्र नवापारा से जुड़ी हितग्राही श्रीमती लालसा कुमारी (पति श्री ब्रजेश कुमार) गर्भावस्था के दौरान आंगनबाड़ी केन्द्र से नियमित सेवाएँ प्राप्त करती रहीं। परिणामस्वरूप 12 जुलाई 2024 को जन्में उनके पुत्र शिवांश का जन्म वजन 2.700 ग्राम रहा।
जन्म के बाद लम्बे समय तक मायके में रहने और पोषण की पर्याप्त देखरेख न होने से शिवांश का वजन धीरे-धीरे कम हो गया। नियमित वजन मापन के दौरान आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व मितानिन ने पाया कि बच्चा मध्यम कुपोषित श्रेणी में चला गया है। स्थिति की जानकारी होते ही कार्यकर्ता और मितानिन ने तत्काल संयुक्त गृह भेंट कर आवश्यक परामर्श दिया।
आहार संबंधी मार्गदर्शन
श्रीमती लालसा कुमारी को समझाया गया कि अपने भोजन में संतुलित आहार लें जिसमें अंकुरित अनाज, मौसमी फल और विशेषकर मुनगा भाजी का समावेश हो। बच्चे को स्तनपान के साथ-साथ ऊपरी आहार देना प्रारंभ करें। सलाह दी गई कि दिन में कम से कम 4-5 बार हल्का और सुपाच्य भोजन जैसे-दलिया, खिचड़ी, गाढ़ी दाल, दूध, हरी पत्तेदार सब्जियाँ दें।
साथ ही आंगनबाड़ी केन्द्र से मिलने वाले रेडी टू ईट आहार (हलुआ, लपशी, पंजीरी आदि) को निर्धारित मात्रा में बनाकर प्रतिदिन खिलाने की जानकारी दी गई। इसके अतिरिक्त नियमित टीकाकरण और भोजन में विविधता लाने पर विशेष जोर दिया गया।
सामुदायिक जागरूकता
राष्ट्रीय पोषण माह 2025 के दौरान आयोजित सुपोषण चौपाल में हितग्राही महिला, उनके पति और सास को बुलाकर विस्तृत जानकारी दी गई। अन्नप्राशन कार्यक्रम भी आयोजित किया गया जिसमें पर्यवेक्षक द्वारा ऊपरी आहार और संतुलित पोषण की महत्ता बताई गई। इसी अवसर पर एएनएम ने स्वच्छता और स्वास्थ्य संबंधी मार्गदर्शन भी दिया।
परिणाम : कुपोषण से स्वास्थ्य की ओर
लगातार गृहभेंट, संतुलित आहार और आंगनबाड़ी से मिलने वाले पोषण आहार के नियमित उपयोग से शिवांश की स्थिति में सुधार होने लगा। कुछ ही महीनों में बच्चा पुनः सामान्य श्रेणी में आ गया।
यह उदाहरण स्पष्ट करता है कि यदि आंगनबाड़ी सेवाओं, मितानिन और परिवार के संयुक्त प्रयास को अपनाया जाए, तो कुपोषण जैसी समस्या पर सफलतापूर्वक काबू पाया जा सकता है। शिवांश की यह कहानी ग्रामीण अंचल की अन्य माताओं के लिए प्रेरणा है।

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