महर्षि वाल्मीकि जयंती का महत्व बहुत अधिक है, क्योंकि यह आदिकवि और रामायण के रचयिता के रूप में उनकी जयंती को मनाने के लिए एक विशेष अवसर है। इस बार यह जयंती 7 अक्टूबर को मनाया जा रहा है।
महर्षि वाल्मीकि जयंती का महत्व
महर्षि वाल्मीकि जयंती आश्विन मास की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाती है, जो इस साल 7 अक्टूबर को पड़ रही है। इस दिन को बहुत पवित्र माना जाता है क्योंकि यह न केवल शरद पूर्णिमा का पर्व है, बल्कि महर्षि वाल्मीकि की जयंती भी है। महर्षि वाल्मीकि का असली नाम रत्नाकर था, जिन्होंने भगवान राम के जीवन पर आधारित महाकाव्य रामायण की रचना की।
उत्तर प्रदेश में महर्षि वाल्मीकि जयंती
उत्तर प्रदेश में महर्षि वाल्मीकि जयंती को बहुत धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन प्रदेशभर के देव मंदिरों और महर्षि वाल्मीकि से संबंधित स्थलों पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इन कार्यक्रमों में रामायण पाठ, भजन-कीर्तन, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, दीप प्रज्ज्वलन और दीपदान शामिल होंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निर्देश दिए हैं कि इन कार्यक्रमों में जनसहभागिता और जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति सुनिश्चित की जाए।
विशेष आयोजन
महर्षि वाल्मीकि की तपोस्थली लालापुर (चित्रकूट) में राज्य स्तरीय वृहद आयोजन किया जाता है। इस अवसर पर दीपदान के साथ-साथ रामायण पाठ और भक्ति-सांस्कृतिक प्रस्तुतियां होंगी। इसके अलावा अयोध्या, प्रयागराज, बिठूर (कानपुर), श्रावस्ती, राजापुर (चित्रकूट) सहित पूरे प्रदेश में विशेष आयोजन होंगे।
स्कूलों में अवकाश
उत्तर प्रदेश, दिल्ली और मध्य प्रदेश में महर्षि वाल्मीकि जयंती के अवसर पर स्कूलों में अवकाश घोषित किया गया है। यह अवकाश सरकारी और निजी दोनों स्कूलों पर लागू होता है।



