जिला मुख्यालय बैकुण्ठपुर का पीजी कॉलेज भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरा हुआ है, जिसमें पूर्व प्राचार्य पर 26 साल तक प्रभारी रहने और करोड़ों रुपये के घोटाले का आरोप है। और शासन व राजनेताओं को पीजी काॅलेज के कृत्यों पर ध्यान न देकर छात्रों के अनहित पर ध्यान दिया जा रहा है। जानकार सूत्र बताते है कि, शासन और सत्ताधारी नेताओं को इसकी जानकारी होने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। वहीं इस मामले में उच्च स्तरीय जांच की मांग की जा रही है, ताकि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सके। और लोगों में चर्चा है कि इतने बड़े घोटाले को दबाने के लिए ऊपर तक करोड़ों रुपये बांटे गए होंगे, इसलिए कार्रवाई नहीं हो रही है। यहां तक कि, श्रीमान् सचिव आयुक्त को भी फोन पर अवगत कराया गया है और उन्होंने जांच की बात कही है। और आयुक्त द्वारा कहा गया है कि, पीजी काॅलेज के सभी पूर्व और वर्तमान प्राचार्य भी सम्मिलित है।

वहीं बैकुण्ठपुर के पीजी कॉलेज में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के आरोपों के बीच एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें पूर्व प्रभारी प्राचार्य पर रिटायरमेंट के बाद भी कॉलेज में जाकर दस्तावेज जलाने का आरोप है। यह एक अपराध की श्रेणी में आता है, लेकिन वर्तमान प्राचार्य ने इस मामले में थाना में रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई है जो उनकी भूमिका पर सवाल उठाता है। यहां तक कि, पूर्व प्रभारी प्राचार्य पर आरोप है कि उन्होंने रिटायरमेंट के बाद भी कॉलेज में जाकर महत्वपूर्ण दस्तावेज जलाए जो भ्रष्टाचार के सबूत हो सकते थे। यह एक गंभीर अपराध है, जिसमें कॉलेज के रिकॉर्ड और साक्ष्यों को नष्ट करने का प्रयास किया गया है। बताया जा रहा है कि, पीजी कॉलेज के कार्य अभी भी पूर्व प्रभारी प्राचार्य के निर्देशन में चल रहे हैं, जो एक चिंताजनक स्थिति है। इसके अलावा पूर्व प्रभारी प्राचार्य की पत्नी प्रीति गुप्ता पोंड़ी बचरा कॉलेज की प्राचार्य हैं फिर भी पीजी काॅलेज बैकुण्ठपुर में कार्यभार संभाले हुई है। क्या इस पर किसी का भी ध्यान नहीं ?
इसी दौरान प्रशासन ने पीजी कॉलेज की जमीन पुलिस अधीक्षक कार्यालय के लिए आवंटित की है, जिस पर छात्रों और स्थानीय लोगों ने आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि इस जमीन पर कॉलेज का कब्जा है और यहां भविष्य में क्लासेज भी चलेंगी। ऐसे में जमीन का आवंटन कैसे किया गया ? लोगों का कहना है कि, कॉलेज में छात्रों की संख्या बढ़ रही है और उन्हें अधिक कक्षाओं और सुविधाओं की आवश्यकता है। ऐसे में जमीन का आवंटन कॉलेज के भविष्य के लिए खतरा हो सकता है। और प्रशासन पर आरोप है कि उन्होंने बिना उचित जांच और अनुमति के जमीन का आवंटन किया है। जो उचित नहीं है। प्रशासन से मांग की जा रही है कि वह जमीन का आवंटन रद्द करे और कॉलेज के लिए वैकल्पिक जमीन उपलब्ध कराए। इस मामले में संसद और वर्तमान प्राचार्य ने प्रशासन से लेकर उच्च अधिकारियों तक को पत्र लिखकर निवेदन किया है। और महामहिम राज्यपाल को भी अवगत कराया गया है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है।
जानकार सूत्र बताते है कि, बैकुण्ठपुर में पीजी कॉलेज की जमीन को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। जहां सत्ताधारी दलों पर आरोप है कि वे हस्ताक्षर अभियान चलाकर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। पिछले अनुभवों से सीख लेते हुए, जहां दोनों पार्टियों के अंदोलकारियों के प्रयासों के बावजूद बैकुण्ठपुर मुख्यालय को नहीं बचाया जा सका, यह चिंता का विषय है कि शायद उच्च न्यायालय बिलासपुर की शरण लेनी पड़ सकती है। यह समाचार आम जनता के विचारधाराओं द्वारा प्रकाशित किया जा रहा है।



