जिला मुख्यालय एमसीबी में पत्रकारों द्वारा व्यापारियों के साथ शोषण की खबरें सामने आ रही हैं। वहीं नेताओं और नवयुवक पत्रकारों के गठजोड़ से शासकीय विभागों में समस्याएं बढ़ रही हैं। हाल ही में वन विभाग में डीएफओ के साथ ऑफिस में घुसकर गाली-गलौज की घटना ने मुख्यालय को शर्मसार कर दिया है। जहां नेताओं और पत्रकारों के बीच गठजोड़ एक गंभीर समस्या है। यह गठजोड़ शासकीय विभागों में समस्याएं पैदा कर रहा है और आम जनता के हितों को नुकसान पहुंचा रहा है। आम जनता इस समस्या से परेशान है। उन्हें लगता है कि नेताओं और पत्रकारों के गठजोड़ के कारण उनकी आवाज दब जाती है और उनकी समस्याओं का समाधान नहीं होता है। यह समस्या एक सोची-समझी साजिश का परिणाम लगती है। नेताओं और पत्रकारों के बीच गठजोड़ एक गंभीर मुद्दा है, जिस पर ध्यान देने की आवश्यकता है। शासन और प्रशासन को इस समस्या का समाधान करने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।
जानकार सूत्रों के अनुसार, एमसीबी के कुछ नेताओं और पत्रकारों ने डीएफओ से पैसे की मांग की थी जो बहुत अधिक रकम की बताई जा रही है। जब डीएफओ अपने कर्मचारियों के साथ शासकीय मीटिंग में थे तब इन लोगों ने शासकीय कार्यों में बाधा डाली, जो अपराध की श्रेणी में आता है। जबकि शासकीय कार्यों में बाधा डालना एक गंभीर अपराध है। प्रशासन को ऐसे मामलों में तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए और अपराध दर्ज करना चाहिए। लेकिन इस मामले में अपराध दर्ज नहीं किया गया, जिससे लगता है कि प्रशासन और इन असामाजिकतत्वों के बीच कुछ संबंध हो सकते हैं। ऐसे में प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्हें शासकीय कार्यों में बाधा डालने वालों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए और आम जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए। प्रशासन को अपनी जिम्मेदारियों का पालन करना चाहिए और अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, छत्तीसगढ़ में जगह-जगह पूर्व सरकार द्वारा समूह बनाकर लोगों को बैठने का ठिकाना बना दिया गया है, जिससे अपराध की सीमा बढ़ती जा रही है। इसका कारण यह है कि व्यक्ति सत्य बोलने को तैयार नहीं है। शासन द्वारा प्रेस वालों को दिए जाने वाले मानदेय के बारे में जानकारी नहीं है, लेकिन कुछ पत्रकार लगभग 12-15 लाख रुपये की गाड़ी में घूमते हुए दिखाई दे रहे हैं, जो जांच का विषय है। वहीं छत्तीसगढ़ शासन को इस मामले में कार्यवाही करने के लिए लिखा गया है। शासन को चाहिए कि वह ऐसे मामलों की जांच करे और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे। शासन की जिम्मेदारी है कि वह ऐसे मामलों की जांच करे और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करे। शासन को चाहिए कि वह पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करे और आम जनता के हितों की रक्षा करे।



