जिला मुख्यालय बैकुण्ठपुर में बैंक ऑफ बड़ौदा के शाखा प्रबंधक लगातार बदलते जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि, जिन लोगों को बात करने की तमीज नहीं है, वे बैंक की मैनेजरी कैसे करेंगे ? एक समस्या यह भी है कि, जब क्रेडिट कार्ड में समय अवधि से पहले पैसा आ जाता है, उसके बाद भी बाउंसिंग चार्ज लगा दिया जा रहा है। बैंक में लोगों को बताया जाता है कि, 45 दिन के अंदर कोई भी चार्ज नहीं लगता है। लेकिन बैकुण्ठपुर शाखा प्रबंधक से क्रेडिट कार्ड के संबंध में बात करने पर वे बात करने को तैयार नहीं होते हैं। जब क्रेडिट कार्ड के संबंध में बात की जाती है, तो शाखा प्रबंधक कहते हैं कि जो लड़की क्रेडिट कार्ड का काम देखती है उन्हीं से बात करें। लेकिन एक सप्ताह से अधिक हो गया है और क्रेडिट कार्ड देखने वाली लड़की हितग्राहियों से कोई भी जानकारी नहीं दे रही है। और बताया जा रहा है कि, वही लड़की चार ब्रांचों को देख रही है। जब हितग्राही उनसे बात करते हैं, तो वे कहती हैं कि बैंक ऑफ बड़ौदा में क्रेडिट कार्ड अलग से देखा जाता है, लेकिन आज तक कोई जवाब नहीं मिला।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, चेक द्वारा पैसा जमा करने की समय सीमा 4 तारीख है, लेकिन हितग्राहियों ने 01-08-2025 को ही जमा कर दिया, फिर भी खाते में पैसा नहीं दिखाई दे रहा है। जब बैंक एक-एक दिन का ब्याज वसूलती है, तो हितग्राहियों के साथ ऐसा खिलवाड़ क्यों ? इससे साफ पता चलता है कि, आम जनता के दुख-दर्द को कोई महत्व नहीं दिया जा रहा है। ऐसी शिकायतें एक या दो नहीं, बल्कि सैकड़ों की संख्या में सुनने को मिलेंगी। लोगों को क्रेडिट कार्ड के नाम से खाली गुमराह किया जा रहा है। इसका जीता-जागता प्रमाण इस समाचार के साथ संलग्न पर्ची से मिलता है।

आम जनता आरबीआई की गाइडलाइन को देखते हुए मांग करती है कि, बैंक में एक ही व्यक्ति की शिकायत नहीं है, बल्कि अनेकों आम जनता की शिकायतें हैं। यहां तक कि, इस संबंध में ऑनलाइन बात करने पर बताया गया कि, 4000 रुपये का कुछ पैसा कुछ दिनों में दिखने लगेगा। लेकिन यह तरीका समझ से परे है कि दो सप्ताह से पैसा खाते में जमा नहीं हो पा रहा है। यहां तक कि, जब ऑनलाइन द्वारा आवेदक के खाते से पैसा काट लिया जाता है, तो पैसा जमा क्यों नहीं हो रहा है ? इससे हितग्राहियों के साथ धोखाधड़ी का मामला उजागर हो रहा है। क्योंकि जब चेक द्वारा तुरंत पैसा काटा जाता है, तो उस पैसे को बैंक तुरंत जमा क्यों नहीं करती ? कार्ड एक धोखा है, और ब्रांच मैनेजर कोई जिम्मेदारी नहीं समझते। खाली कहने को एक न एक खामियां बताते रहते हैं कि आपके खाते में डेबिट ब्लॉक कर दिया गया है। इस तरीके से लोगों को गुमराह कर हितग्राहियों के खाते से पैसा निकाला जा रहा है।
सोचने वाली बात है कि, किसी का पैसा निकालना, धोखाधड़ी करना और गुमराह करना यह किस तरह की कार्यप्रणाली है ? यह जानना जरूरी है कि किस नियम के अंतर्गत डेबिट ब्लॉक करने का अधिकार दिया गया है, जिसके बारे में हितग्राहियों को पता ही नहीं है। और बाउंस चार्ज के नाम पर अंधाधुंध नियम बना दिए गए हैं। बैंक की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता की कमी और नियमों की अनदेखी से हितग्राहियों को परेशानी हो रही है। यह जरूरी है कि बैंक अपने नियमों और शर्तों को स्पष्ट रूप से बताएं और हितग्राहियों के अधिकारों का सम्मान करें। यह समाचार आम जनता के विचारधाराओं द्वारा प्रकाशित किया जा रहा है।


