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बैकुण्ठपुर/कोरिया : पीजी काॅलेज में अतिथि व्याख्याता के डिग्रियों पर आम जनता को संदेह ?…………..

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जिला मुख्यालय बैकुण्ठपुर में शासकीय रामानुज प्रताप सिंहदेव स्नात्तक काॅलेज के बारे में लोगों में कई तरह की चर्चाएं और सवाल उठ रहे हैं। साथ ही पूर्व प्राचार्य अखिलेश चन्द्र गुप्ता को लेकर भी लोगों के बीच विभिन्न विचारधाराएं उत्पन्न हो रही हैं। क्योंकि इस महाविद्यालय से चार और महाविद्यालय भी संबंधित है। कुछ लोगों का कहना है कि, उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान भ्रष्टाचार किया और नियमों का भी उल्लंघन किया है। पूर्व प्राचार्य अखिलेश चन्द्र गुप्ता पर आरोप है कि उन्होंने अपने सेवानिवृत्ति के बाद भी महाविद्यालय के गोपनीय दस्तावेजों को जलाकर नष्ट कर दिया। एवं इसमें खरीदी में अनियमितताएं और अपलेखन शामिल हैं। यह एक गंभीर अपराध है और इसकी जांच होनी चाहिए।

लोगों का कहना है कि संजय सिंह और राजकुमार राजवाड़े आॅपरेटरों की नियुक्ति नियमों के विरुद्ध हुई है जो कि पूर्व प्राचार्य ने की है। जानकार सूत्र बताते है कि, अतिथि विख्याता की अवधि एक साल की होती है परंतु संजय सिंह व राजकुमार राजवाड़े जो कि आॅपरेटर बताया जा रहा है वह कई वर्षो से एक ही महाविद्यालय में कार्यरत् है साथ ही यह लोग बचरापोंड़ी महाविद्यालय का कार्य भी बैकुण्ठपुर के महाविद्यालय से करते है। लोगों में चर्चाऐं है कि, इनकी नियुक्ति किस पद पर किया गया और किस आधार पर किया गया ? वही लोगों में इस बात की भी चर्चाऐं है कि, उनको काॅलेज की आईडी भी दिया गया है और फाॅर्म भरने का भी छात्रों से लगभग 100-200 रूपये ले लिया जाता है। यह एक जांच का विषय है कि, आॅपरेटर के रूम का सीसीटीवी कैमरा बंद क्यों है ?

प्राप्त जानकारी के अनुसार, पूर्व प्राचार्य की कुछ गतिविधियां इस तरह है कि, जब रिटायर्डमेंट होने के 6 माह बाद काॅलेज में किसने बुलाया और किसके आदेश पर गये ? और काॅलेज के दो रूम में किसके आदेश पर ताला लगा दिये गये है ? वहीं पूर्व प्राचार्य के द्वारा बताया गया कि, बड़े बाबू ढेवर के दिशा-निर्देश पर रूम खोला गया और वहां से दस्तावेज निकाले गये और जलाया गया। आम जनता पुछना चाहती है कि, जब काॅलेज से पूर्व प्राचार्य रिटायर्ड हो गये तो दो रूम में ताला लगाने का अधिकार किसने दिया ? यह जांच का विषय है।

लोगों में इस बात का चर्चा का विषय बना हुआ है कि, बचरापोंड़ी में जितने भी कार्य हुए है एवं फर्नीचर का उल्लेख भी जानना चाहते है क्योंकि वहां का प्राचार्य प्रिति गुप्ता है। जो कि बचरापोड़ी का प्रभार संभाले हुए है साथ ही वह बैकुण्ठपुर महाविद्यालय में भी कार्यभार संभाले हुए है। यह नियम विरूद्ध है। इस संबंध में वर्तमान प्राचार्य से वशिष्ठ टाइम्स के संपादक से बातचीत हुआ है तो उन्होंने अपना पल्ला झाड़ते हुए बताया कि, जिस वक्त दस्तावेज जलाये गये उस वक्त मैं बिलासपुर गया हुआ था। अब सवाल यह उठता है कि, ऐसा क्या आ पड़ी कि, पूर्व प्राचार्य ने वर्तमान प्राचार्य की अनुपस्थिति में दस्तावेजों को जलाना ? और वर्तमान प्राचार्य की अनुपस्थिति में महाविद्यालय में जाना एक अपराध की श्रेणी में आता है।

सोचने वाली बात है कि, प्रभारी प्राचार्य साल-दो साल के लिए होता है पर पूर्व प्रभारी प्राचार्य ने अपने 30 साल का पूरा जीवन महाविद्यालय में कैसे लगा दिये ? यह राज्य शासन की अनियमितता कहा जा सकता है। लोगों में इस बात की भी चर्चा है कि, जितने भी अतिथि व्याख्याता रखे गये है वह भी पूर्व प्राचार्य से कुछ ले देकर नियुक्त हुए है। क्योंकि इस महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य के नाम से पूरा स्टाॅफ कांपती थी उसी महाविद्यालय के अतिथि व्याख्याताओं ने पूरा वीडियों बनाया और दस्तावेजों को जलते हुए देखा गया जो कि महाविद्यालय के सीसीटीवी में कैद हुआ होगा और नहीं कैद होगा तो इससे पता चलता है कि, महाविद्यालय में लापरवाही की जा रही है। इससे यह मालूम पड़ता है कि, पूरा स्टाफ इसमें भी संलिप्त था। सोचने वाली बात है कि, पीजी काॅलेज में लड़के के साथ साथ लड़कियां भी पढ़ती है तो सीसीटीवी की निगरानी में लापरवाही क्यों ? क्या अप्रिय घटना का इंतजार कर रहे है ?

जानकार सूत्र बताते है कि, इसी प्रकार 1 फरवरी 2025 से 30 जून तक कुछ भ्रष्टाचारी का लम्बा खेल भी चला होगा। और पूर्व में भी भ्रष्टाचारी का खेल चलता रहा। जिसमें बड़े बाबू ढेवर भी संलिप्त है। यह जांच का विषय है। यह समाचार आम जनता के विचारधाराओं द्वारा प्रकाशित किया जा रहा है।

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