Home कोरिया बैकुण्ठपुर/कोरिया : स्नात्तक विद्यालय बना लूटेरों का अड्डा ?……………..

बैकुण्ठपुर/कोरिया : स्नात्तक विद्यालय बना लूटेरों का अड्डा ?……………..

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जिला मुख्यालय बैकुण्ठपुर के स्नात्तक विद्यालय में अनियमितताओं के कारण छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। वहीं पूर्व प्राचार्य प्रभारी अलिखेश गुप्ता के सोशल मीडिया के बयान पर विवाद खड़ा हो गया है, जिसमें उन्होंने कहा है कि बाबू आरीफ ढेवर की सलाह से कागजात जलाए गये हैं। जिसका यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है और कई सवाल खड़े हो रहे है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, बाबू आरीफ ढेवर जो कि पूर्व प्राचार्य ने नौकरी पर नियुक्त किया था। उन्होंने बताया कि, मेरे से फर्जी तरीके से करोड़ों का बिल बनवा-बनवाकर पैसा निकाला गया है। वहीं छत्तीसगढ़ शासन के पैसे का दुरुपयोग किया गया हैं। जो कि मुरूम डालने, पोताई करने, फर्जी प्रोग्राम और फर्नीचर के नाम पर करोड़ों रुपये फर्जी ढंग से पैसा निकाले गए हैं। साथ ही जो दस्तावेजों को आग के हवाले किया गया है और जो रूम में ताला लगा दिया गया है। उसके संबंध में पूर्व प्रभारी प्राचार्य का कहना है कि, एक चाबी बाबू आरीफ ढेवर के पास है और दूसरी चाबी पूर्व प्राचार्य के पास है।

बाबू ने मोबाइल पर बताया है कि पूर्व प्रभारी प्राचार्य ने सैकड़ों करोड़ों रुपये का फर्जी ढंग से पैसा निकालकर रायपुर और बिलासपुर में मकान खरीदे हैं। साथ ही अनुमान है कि पंद्रह करोड़ के महल भी खरीदे गए हैं। बाबू का कहना है कि उन्होंने पूर्व प्रभारी प्राचार्य के निर्देश पर एक-एक ऑपरेटर के नाम से लगभग चार-पांच फर्जी बिल बनाए जाते थे। और इस संबंध में अन्य स्टाफ का भी सहयोग था। कुछ लोगों का कहना है कि, पूर्व प्रभारी प्राचार्य और बाबू ने महत्वपूर्ण कागजों को अग्नि के हवाले किया है। जिसमें सवाल है कि, किसके निर्देश पर कागजों को जलाया गया और क्या इसके लिए कोई समिति बनाई गई थी ? और पूर्व प्राचार्य को स्नातक विद्यालय में किसने बुलाया था ? यह भी एक सवाल है। कुछ लोगों का कहना है कि पूर्व प्राचार्य की धर्मपत्नी प्रीति गुप्ता बचरापोड़ी के चार्ज में भी हैं। और बैकुण्ठपुर स्नात्तक में भी जार्च संभाले हुए है।

सोशल वीडियो में पूर्व प्राचार्य का बयान

एक सोशल वीडियो में पूर्व प्राचार्य ने कहा है कि उन्होंने कोई भी कागज नहीं जलाया है और उनके खिलाफ बदनामी के लिए षणयंत्र रचे जा रहे हैं। पूर्व प्राचार्य ने कहा है कि स्नात्तक विद्यालय के बाबू के निर्देश से कागज जलाए गए हैं। वहीं बताया जा रहा है कि, एक जनवरी 2025 से अभी भी बीच में फर्जी बिल बनाए गए हैं। यह जांच का विषय है कि कैसे और किन परिस्थितियों में यह हुआ ?

बताया जा रहा है कि पूरा स्टाफ पूर्व प्रभारी प्राचार्य से कंापता था, लेकिन अब सेवानिवृत्त होने के बाद उन्हीं के स्टाफ ने पूरा उनका वीडियो वायरल कर दिया है। यह भी जांच का विषय है। अब देखना यह है कि उप संचालक स्नातक विद्यालय अम्बिकापुर और छत्तीसगढ़ राज्य शासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है ? यदि आरोप सच हैं, तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करना आवश्यक है। इस मामले में पारदर्शिता और जवाबदेही की आवश्यकता है, ताकि आम जनता को पता चल सके कि क्या हुआ है और कौन जिम्मेदार है ? जांच से ही सच्चाई सामने आ सकेगी।

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