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बैकुण्ठपुर/कोरिया : नई पीढ़ी के पत्रकारों द्वारा तत्वहीन समाचार को लेकर वशिष्ठ टाइम्स के संपादक को दी जा रही धमकी…………..

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जिला मुख्यालय बैकुण्ठपुर में कुछ लोगों के साथ संपादक ने मर्डर केस में फंसे हुए लोगों का जेल जाकर साथ दिया और उनका समर्थन किया। संपादक ने प्रेस की मकान तोड़ने के लिए प्रशासन द्वारा दिए गए नोटिस के खिलाफ आवाज उठाई और उनके लिए भूख हड़ताल पर बैठ गए। वहीं संपादक ने जिन लोगों की मदद की, आज उनके परोपकार को भुला दिया गया है। अब संपादक को लेकर एक विवादित लेख लिखा गया है, जिस पर सवाल उठ रहे हैं। लेख में संपादक की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं कि लेख में उठाए गए सवाल उचित हैं या अनुचित।

बता दें कि, पूर्व प्रकाशित समाचार में फर्जी पत्रकारों के साथ फोटो का उल्लेख किया गया था, जो कि कुछ लोगों का था। लेकिन इसका समाचार से कोई संबंध नहीं है। यह एक अप्रासंगिक जानकारी है जो समाचार के मुख्य विषय से भटकाती है। उस फोटो का संपादक से कोई संबंध नहीं है, और न ही उस फोटो से फर्जी पत्रकारों का कोई उल्लेख है। फोटो को लेकर बैठक का समाचार बनना था, लेकिन कुछ कारणों से नहीं बन पाया। एक कहावत है ‘‘आ बैल मुझे मार” जो इस स्थिति में प्रासंगिक हो सकती है। यह कहावत उन लोगों के लिए उपयुक्त हो सकती है जो बिना किसी कारण के हमला करने या आलोचना करने की कोशिश करते हैं। वशिष्ठ टाइम्स के संपादक ने पत्रकारों के हित में बहुत कार्य किये है। जो कि बैकुण्ठपुर की बस्ती में संपादक के योगदान को सभी जानते हैं और उनकी सराहना करते हैं। किसी व्यक्ति के अच्छाई और बुराई का बखान करना तब तक बेकार है जब तक वह व्यक्ति जीवित है। लेकिन जब कोई व्यक्ति चला जाता है, तो उसके कार्यों और योगदानों का मूल्यांकन करना स्वाभाविक है।

वशिष्ठ टाइम्स संपादक की आलोचना पर चर्चा

कुल लोगों के द्वारा वशिष्ठ टाइम्स संपादक की आलोचना की जा रही है जबकि वह पत्रकारों के हित में हमेशा आवाज उठाते रहे हैं। संपादक के खिलाफ आलोचना का कारण समझ से परे है खासकर जब वह पत्रकारों के हितैषी रहे हैं। वशिष्ठ टाइम्स ने कोरिया जिले के कुछ पत्रकारों के बारे में आवाज उठाई है, जिन्हें फर्जी पत्रकार कहा जा रहा है। इस मुद्दे को लेकर संपादक के खिलाफ आलोचना की जा रही है, जो अनुचित है। वशिष्ठ टाइम्स ने पहले भी राज्य शासन और कोरिया प्रशासन को फर्जी पत्रकारों के बारे में लिखा है। जिससे संपादक को कई बार धमकी दी गई है, लेकिन वह पत्रकारों के हित में आवाज उठाना जारी रखते हैं। यहां तक कि, वशिष्ठ टाइम्स ने भारतीय प्रेस परिषद को पत्र लिखकर बताया है कि बैकुण्ठपुर जनसंपर्क विभाग पर दबाव बनाया जा रहा है। इस दबाव के कारण कोरिया प्रशासन, कलेक्टर और जनसंपर्क अधिकारी भय में हैं।

फर्जी पत्रकारों के खिलाफ

वहीं संपादक ने फर्जी पत्रकारों के खिलाफ आवाज उठाई है, जो पोर्टल के नाम पर पेपर छपवाते हैं और पत्रकारिता की गरिमा को ठेस पहुंचाते हैं। संपादक ने फर्जी पत्रकारों के खिलाफ कार्रवाई करने का फैसला किया है जो पत्रकारिता की दुनिया में एक स्वागत योग्य कदम है। इनके खिलाफ वशिष्ठ टाइम्स कार्यालय में फर्जी पत्रकारों के बारे में प्रमाण उपलब्ध हैं।

पूर्व की घटनाएं

पूर्व एसडीएम सुनील जैन गवाह हैं कि वशिष्ठ टाइम्स के संपादक ने प्रेस टूटने से बचाया था। यह घटना बैकुण्ठपुर के आम जनता ने देखी थी और संपादक की जीत हुई थी। पर वशिष्ठ टाइम्स के संपादक ने पूर्व में स्व. संपादक के साथ कंधा से कंधा मिलाकर सफलता पाई थी। तक उस समय के पत्रकारों ने संपादक की भूमिका को देखा था और उनकी सराहना की थी। और आजकल कुछ नई पीढ़ी के पत्रकार संपादक को धमकाने और बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। इस संबंध में राष्ट्रपति से लेकर प्रधानमंत्री तक सभी जगह लिखापढ़ी की गई है जो बैकुण्ठपुर के प्रशासन को संपादक के संबंध में भ्रमित किया जा रहा है। यह सोचने वाली बात है कि बैकुण्ठपुर के नई पीढ़ी के पत्रकार संपादक को ही संपादक से लड़ा रहे हैं।

आगे विस्तार से उल्लेख किया जायेगा कि, कौन-कौन से समाचार पत्रकार पोर्टल के नाम पर गणतंत्र दिवस व स्वतंत्र दिवस के अवसर पर विज्ञापन छपवाकर पैसा वसूल रहे है।………..

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