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अम्बिकापुर/CG : महिला बाल विकास परियोजना अधिकारी के नदारद होने से विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल ?……………..

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मुख्यालय अम्बिकापुर के नजदीक दरिमा में महिला बाल विकास परियोजना अधिकारी के नदारद होने से विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। इस अधिकारी की अनुपस्थिति से विभाग के कार्यों पर असर पड़ रहा है, जिससे महिलाओं और बच्चों को मिलने वाली सुविधाओं और सेवाओं में देरी हो रही है। विभाग की जिम्मेदारी महिलाओं और बच्चों के कल्याण और विकास के लिए योजनाएं चलाने और विभिन्न विकास विभागों के साथ समन्वय स्थापित करने की है। अधिकारी की अनुपस्थिति में इन कार्यों को कौन संभाल रहा है, यह एक बड़ा सवाल है ?

जानकार सूत्रों के अनुसार, महिला बाल विकास परियोजना अधिकारी के द्वारा कार्यकर्ताओं से पैसे वसूले जाने की बात सामने आई है। आरोप है कि, अधिकारी अपने कार्यालय में नियमित रूप से नहीं बैठती हैं और कार्यालय का कामकाज प्यून और चपरासी संभालते हैं। यह कोई पहला मामला नहीं है जब इस तरह के आरोप लगे हों। पूर्व में भी परियोजना अधिकारी पर लाखों रुपये का हेराफेरी के आरोप लगे थे। अब वर्तमान परियोजना अधिकारी सीएम सिंहा पर भी इसी तरह के आरोप लग रहे हैं। बताया जाता है कि, कार्यालय में जब भी अधिकारी की जानकारी मांगी जाती है तो चपरासी द्वारा बताया जाता है कि, वे मुख्यालय में बैठती हैं। इससे यह सवाल उठता है कि, क्या अधिकारी वास्तव में अपने कार्यालय में आती हैं या नहीं ?

कुछ लोगों का आरोप है कि, महिला बाल विकास परियोजना कार्यालय में मीटिंग भी केवल कागजों पर ही होती है और वास्तविकता में कुछ नहीं होता। जब भी लोग कार्यालय आते हैं, तो उन्हें केवल प्यून ही मिलते हैं जो पानी पिलाने का काम करते हैं। लोगों में चर्चा है कि, शासन द्वारा दी गई सामग्री, जो बच्चों और गर्भवती माताओं के लिए है, उसे बाजार में जानवरों को खिलाने के लिए 25 रुपये किलो बेचा जा रहा है। यदि कार्यालय का कामकाज चपरासी और प्यून द्वारा संभाला जा रहा है तो इससे कार्यालय और विभाग की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। इससे यह सवाल उठता है कि, क्या कार्यालय में पारदर्शिता और जवाबदेही है ?

महिला बाल विकास विभाग की योजनाएं जैसे कि आंगनबाड़ी सेवाएं, पोषण आहार, और स्वास्थ्य सेवाएं महिलाओं और बच्चों के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। अधिकारी की अनुपस्थिति से इन योजनाओं के क्रियान्वयन में समस्याएं आ सकती हैं। विभाग को चाहिए कि वह इस मामले में जांच करे और अधिकारी की अनुपस्थिति के कारणों का पता लगाए। साथ ही, विभाग को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि महिलाओं और बच्चों को मिलने वाली सुविधाओं और सेवाओं में कोई देरी न हो।

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