जिला मुख्यालय में पत्रकारिता के नाम पर अवैध गतिविधियाँ बढ़ रही हैं। यहाँ कुछ लोग वेबसाइट, पोर्टल बनाकर या 500 रुपये में आईटी लेकर अवैध वसूली कर रहे हैं। इसके अलावा कलेक्टर के साथ फोटो खींचवाकर सोशल मीडिया में लगाकर अधिकारियों को चमकाने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। जानकार सूत्र बताते है कि, जो व्यक्ति पैसा नहीं देता है, उसके खिलाफ सोशल मीडिया पर हमला किया जाता है। इससे लगता है कि, पत्रकारिता के नाम पर अवैध गतिविधियाँ बढ़ रही हैं और लोगों को परेशान किया जा रहा है। कुछ लोग समूह और संगठन बनाकर अवैध वसूली कर रहे हैं। ये लोग सोसायटी एक्ट के अन्तर्गत बनाकर करोड़ों रुपये निकाल रहे हैं और पत्रकारिता की धज्जियां उड़ा रहे हैं। बताया जा रहा है कि, पत्रकारिता की आड़ में स्वास्थ्य विभाग पर दबाव बनाकर अवैध गतिविधियाँ की जा रही हैं। शहर से 9 किमी की दूरी पर 18 हजार रुपये प्रति माह स्वास्थ्य विभाग को दिया गया है, जो संदेहास्पद है। साथ ही कुछ नई पीढ़ी के पत्रकार पत्रकारिता के नाम पर अवैध गतिविधियों में शामिल हैं। वे कोयला चोरी और सूचना के अधिकार का दुरुपयोग कर रहे हैं और अपने निजी हितों के लिए काम कर रहे हैं।

भारत में पत्रकारिता के नाम पर कुछ लोगों द्वारा दबाव डालकर चंदा वसूलने और प्रशासन पर प्रभाव डालने की खबरें चिंताजनक हैं। पत्रकारिता एक संवैधानिक अधिकार है, जो भारतीय संविधान के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के रूप में संरक्षित है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि, कोई भी व्यक्ति बिना किसी योग्यता या पंजीकरण के पत्रकार बन सकता है।

पत्रकार बनने के लिए आवश्यक योग्यता
प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के अनुसार, पत्रकारों के लिए आरएनआई (रजिस्ट्रार ऑफ न्यूजपेपर्स फॉर इंडिया) में पंजीकरण आवश्यक है, लेकिन यह पत्रकारिता की विश्वसनीयता और वैधता को दर्शाता है। पत्रकारिता में कोई विशिष्ट योग्यता निर्धारित नहीं है, लेकिन अधिकांश पत्रकारों के पास पत्रकारिता में लिखने तक नहीं जानते वह भी जुडे़ हुए है। व पत्रकारों को अपने विचारों और समाचारों को प्रकाशित करने की स्वतंत्रता है, लेकिन इसके साथ ही उन्हें अपनी सीमाओं का भी ध्यान रखना होता है, जैसे कि राष्ट्रीय सुरक्षा, लोक व्यवस्था और शिष्टाचार का उल्लंघन नहीं करना। साथ ही पत्रकारों को सरकारी विभागों और मंत्रालयों से जानकारी प्राप्त करने का अधिकार है, लेकिन इसके लिए उन्हें औपचारिक अनुमति लेनी होती है। परंतु पत्रकारिता में पारदर्शिता और जवाबदेही बहुत जरूरी है। यहां देखा जा रहा है कि, पत्रकारिता के नाम पर धौस देकर चंदा मांगा जा रहा है क्योंकि भीड़ देखकर कलेक्टर व एसपी भी दबाव में आ जाते है। क्या भारत सरकार इनको इस बात का अधिकार दिया है कि, नाबालिक को पत्रकार बनाने का अधिकार है ? कहीं छत्तीसगढ़ शासन से पत्रकारों के लिए बहुत बड़ी चुक तो नहीं। बताया जा रहा है कि, रायपुर में तो पत्रकारिता का नकाब लगाकर भवन भी दिये जा रहे है। क्योंकि आए दिन प्रशासन के ऊपर दबाव बनाकर अपना-अपना काम साध रहे है। यही बात है कि, कलेक्टर ईमानदार व स्वच्छ छवि के पत्रकारों के ऊपर ध्यान नहीं दे रही है। जिससे नई पीढ़ी के पत्रकार समूह बनाकर संपादक के ऊपर हावी होने की कोशिश कर रहे है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, नई पीढ़ी के पत्रकार पत्रकारिता की आड़ में शासकीय अधिकारियों, नेताओं और ठेकेदारों से पैसे वसूलते हैं और सरकार के अधिकारियों से विज्ञापनों के नाम पर मोटी रकम लेते हैं। ऐसे मामलों में कार्रवाई की आवश्यकता है, ताकि पत्रकारिता की गरिमा बनी रहे और अवैध गतिविधियों पर रोक लग सके। छत्तीसगढ़ शासन और प्रशासन को चाहिए कि वे ऐसे मामलों की जांच करें और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करें। साथ ही पत्रकारिता में पारदर्शिता और जवाबदेही बहुत जरूरी है। पत्रकारों को अपने स्रोतों का खुलासा करना चाहिए और तथ्यों की पुष्टि करने के बाद ही खबरें प्रकाशित करनी चाहिए। इससे पत्रकारिता की विश्वसनीयता बनी रहती है और जनता को सही जानकारी मिलती है।

मिली जानकारी के अनुसार एक ऐसा ही मामला सामने आया है जहां सोशल मीडिया में देखने को मिल रहा है कि, पत्रकारिता के नाम पर कई लोग मोबाईल के द्वारा पैसा मांगा जा रहा है साथ ही पैसा न देने पर उल-जलूल खबरे प्रकाशित किया जा रहा है। जिसके संबंध में एक बीजेपी के कार्यकर्ता ने पत्रकारिता को लेकर बहुत कुछ लिखा है। यहां तक कि, पत्रकारिता के आधार पर करोड़ों रूपये का मामला सामने आया है। कुछ लोगों का कहना है कि, पत्रकारिता के आड़ में 2-3 पत्नी भी रखे हुए है। उनकी सत्यता जानने के लिए सत्ताधारियों का भी उपयोग किया जा रहा है। मीडिया में कार्य करने वाला न मीडिया प्रभारी बन सकता है न ही प्रवक्ता बन सकता है। बस लूटने का साधन नेता लोग सौंपे हुए है। उदाहरण के तौर पर देखा जाये तो जो लोग पूर्व में विधायक के साथ थे आज वही लोग वर्तमान विधायक के साथ है। क्योंकि विधायकों के साथ अच्छे व ईमानदार के व्यक्ति नहीं। खाली पैसा वसूलने वालों की एहीमियत है। क्या छत्तीसगढ़ शासन व प्रशासन ऐसे लोगों के ऊपर कार्यवही करेगा ?

छत्तीसगढ़ में पहले भी पत्रकारिता के नाम पर वसूली और धोखाधड़ी के मामले सामने आ चुके हैं। राजधानी रायपुर में एक बड़े बैंकिंग धोखाधड़ी मामले में 4 करोड़ 95 लाख रुपये की अवैध लेन-देन का प्रयास किया गया था। पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया था और मामले की जांच की जा रही है ।
देखने वाली बात है कि, फोटो में कितने लोग पत्रकार है व कितने लोग ठग है। वरिष्ठ पत्रकार की परिभाषा बोले तो न कोई झूठ बोलना, न ठगना, न दलाली करना और बिना सरकार के आदेश के 15 अगस्त व 26 जनवरी में विज्ञापन निकालना इत्यादि नहीं होता। उनके समूह अच्छे व्यक्तियों का होता है। कोई भी संगठन प्रदेश अध्यक्ष को चाहिए कि, स्वच्छ छवि के लोगों को अपने संगठन का नेतृत्व दें। कहीं छत्तीसगढ़ शासन ने पत्रकारिता को लेकर नई पीढ़ी के पत्रकारों को सहयोग किया तो हर घर में चार-छः पत्रकार पैदा हो जायेंगे। अभी भी एक ही परिवार में पत्नी, पति, पिता व लड़का भी पत्रकार में जुड़े हुए है। आगे इसकी जानकारी विस्तार से दी जायेगी।


