Home कोरिया बैकुण्ठपुर/कोरिया : कोरिया प्रशासन चल रहा राजनेताओं के दबाव में ?…………..

बैकुण्ठपुर/कोरिया : कोरिया प्रशासन चल रहा राजनेताओं के दबाव में ?…………..

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जिला मुख्यालय बैकुण्ठपुर में प्रशासन और राजनेताओं की चर्चा जोरो पर चल रही है। छत्तीसगढ़ में पत्रकारों पर हमले लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में प्रशासन राजनेताओं और माफियाओं के दबाव में काम कर रहे हैं।

मिली जानकारी के अनुसार, जिला मुख्यालय बैकुण्ठपुर में कलेक्टर व पुलिस अधीक्षक दबाव में कार्य कर रहे है। पत्रकार भी इस बात से क्रोधित है। लोगों में तरह-तरह की चर्चाऐं है कि, किसी प्रकार के पत्रकार पर ST/SC के अन्तर्गत केश रजिस्ट्रर हो जाये तो उस व्यक्ति को पुलिस विभाग पताल से खोजकर जेल भेज दिया जाता है। वहीं वशिष्ठ टाइम्स समाचार पत्र के संपादक, जो राष्ट्रीय स्तर पर अपनी विचारधारा के लिए जाने जाते हैं, ने कोरिया कलेक्टर और राजस्व विभाग को सैकड़ों पत्र लिखे हैं। इसके अलावा, उन्होंने पुलिस विभाग को भी लिखित में शिकायत की है। परंतु जानकार सूत्र बताते है कि, कोरिया कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक भ्रष्टाचार में लिप्त हैं और आम जनता भी उन पर भ्रष्टाचारी का आरोप लगा रही है। संपादक का कहना है कि, उन्होंने कई बार इन अधिकारियों के खिलाफ शिकायत की है, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। तथा पत्रकारों की भूमिका समाज में महत्वपूर्ण होती है, और वे अक्सर भ्रष्टाचार और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाते हैं। इस मामले में वशिष्ठ टाइम्स समाचार पत्र के संपादक ने अपनी जिम्मेदारी को बखूबी निभाया है और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई है।

छत्तीसगढ़ शासन में भ्रष्टाचार का मामला

प्राप्त जानकारी के अनुसार, छत्तीसगढ़ शासन के कृषि विभाग बैकुण्ठपुर में एक बड़ा भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है, जिसमें फर्जी बिल लगाकर करोड़ों रुपये निकाले गए हैं। यह मामला सरगुजा संभाग के कमिश्नर द्वारा उठाया गया था, जिन्होंने बाईसागर तालाब के संबंध में कार्रवाई के निर्देश दिए थे। परंतु कमिश्नर के निर्देशों के बावजूद कोरिया कलेक्टर और राजस्व विभाग ने इस मामले में कार्रवाई नहीं की। यह अनदेखी भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने जैसा है और प्रशासन में पारदर्शिता की कमी को दर्शाता है।

भारत सरकार की नीतियों का उल्लंघन

भारत सरकार वरिष्ठ नागरिकों का सम्मान करती है और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए कई नीतियां और योजनाएं चलाती है। लेकिन वशिष्ठ टाइम्स समाचार के संपादक के इस मामले में ऐसा लगता है कि, प्रशासन ने इन नीतियों का उल्लंघन किया है और वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों की अनदेखी की है।

कोरिया जिला में अवैध निर्माण के खिलाफ आवाज

कोरिया जिला में एक 78 वर्षीय सम्मानित व्यक्ति ने कलेक्टर को बार-बार निवेदन किया है कि, तालाब और निस्तार की भूमि पर अवैध निर्माण को रोकने के लिए कार्रवाई की जाए। इस संबंध में उच्च न्यायालय बिलासपुर में भी विचार प्रस्तुत किए गए हैं और नाली व रास्ता अवरुद्ध होने की समस्या को लेकर कोरिया कलेक्टर, एसडीएम और तहसीलदार को लिखा गया है। परंतु कोरिया प्रशासन दबाव में काम कर रहा है और अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर रहा है। वशिष्ठ टाइम्स समाचार पत्र के संपादक ने भी इस मुद्दे पर आवाज उठाई है और लगभग 20 वर्षों से अवैध निर्माण के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे हैं। वहीं लोगों का आरोप है कि, यदि कोई राजनेता इस मुद्दे पर आवाज उठाता है तो प्रशासन तुरंत कार्रवाई करता है। लेकिन यह मामला वशिष्ठ टाइम्स समाचार पत्र के संपादक द्वारा उठाया गया है, इसलिए प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की है। लोगों की मांग है कि, प्रशासन को अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए और तालाब व निस्तार की भूमि को बचाना चाहिए। इससे प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी और आम जनता का विश्वास प्रशासन पर बढ़ेगा।

पत्रकारिता की धौस में दबाव और वसूली

कोरिया जिले में पत्रकारिता की आड़ में दबाव और वसूली के आरोप लगाए गए हैं। एक मामला ऐसा भी है जहां सीएमएचओ डॉ. प्रशांत सिंह पर आरोप है कि, उन्होंने पत्रकारिता की धौस में एक व्यक्ति को लगभग 18 हजार रुपये महीना का लाभ दिलाया है। यहीं नहीं पत्रकारिता का व्यापारिकरण हो रहा है और पत्रकारों का एक समूह प्रशासन पर दबाव बनाने के लिए व्यापार का केंद्र बन गया है। यह समूह स्वच्छ छवि के पत्रकारों पर दबाव बनाने के लिए काम करते है और आम जनता को गुमराह करते है। साथ ही मोबाइल पर भ्रमित ढंग से वसूली की जा रही है और यह समूह व्यापार का केंद्र बन गया है। इस कार्य में केवल 1 प्रतिशत पत्रकार ही स्वच्छ छवि के पाए जाते हैं, जबकि 99 प्रतिशत पत्रकार गांजा, दारू, मुर्गा और सब्जी बेचने वाले जुडे़ हुए होते हैं।

भारत सरकार की भूमिका

लोगों का सवाल है कि, क्या भारत सरकार ऐसे व्यक्तियों पर अंकुश लगाएगी या उन्हें संरक्षण प्रदान करेगी ? यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि, सरकार इस मामले में क्या कार्रवाई करती है ? और पत्रकारिता की आड़ में होने वाले भ्रष्टाचार को रोकने के लिए क्या कदम उठाती है ?

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