Home कोरिया बैकुण्ठपुर/कोरिया : शासकीय उचित मूल्य दुकान में सप्लायर कर रहा भेदभाव ?…………….

बैकुण्ठपुर/कोरिया : शासकीय उचित मूल्य दुकान में सप्लायर कर रहा भेदभाव ?…………….

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जिला मुख्यालय बैकुण्ठपुर के शासकीय उचित मूल्य दुकान डबरीपारा में सप्लायर द्वारा भेदभाव की खबर सामने आई है। जानकार सूत्र बताते है कि, पुराने सोसायटी के समीप शासकीय उचित मूल्य दुकान डबरीपारा में अनियमितता के आरोप लग रहे हैं। यहां बताया जा रहा है कि, एक ही परिवार के सदस्य, जिनमें ननद-भाभी और दो बहनें शामिल हैं, जो कि शासकीय उचित मूल्य दुकान का संचालन कर रहे हैं और अपने रिश्तेदारों को लाभ पहुंचा रहे हैं। यही नहीं दुकान संचालकों द्वारा बाहर से आए मुस्लिम भाइयों, जो झारखंड से हैं, उन्हें भी संरक्षण दिया जा रहा है और उन्हें गलत ढंग से राशन कार्ड और शासकीय योजना का लाभ दिलाया जा रहा है। और इस तरह की अनियमितता से स्थानीय लोगों को अपने अधिकारों से वंचित किया जा रहा है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, हाल ही में यह बात सामने आई है कि, मुस्लिम समाज के लोगों के लिए बड़ी संख्या में राशन कार्ड बनाए गए हैं। इससे यह सवाल उठता है कि, क्या इन राशन कार्डों का वितरण निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से किया गया है। बताया जा रहा है कि, मुस्लिम समुदाय के लोग बड़ी-बड़ी टोपी पहनकर सोसायटी में देखे जा रहे हैं। इससे यह प्रतीत होता है कि, वे सोसायटी के कार्यों में सक्रिय रूप से शामिल हैं। यही नहीं, कुछ मनचले मुस्लिम लड़के अपशब्द का भी उपयोग करते हैं, जो कि अनुचित है।

शासकीय जमीन का दुरुपयोग

मिली जानकारी के अनुसार, बैकुण्ठपुर में शासकीय जमीन को पट्टे या लीज पर एक व्यक्ति ने लिया है, लेकिन कब्जा एक दुकान पर है जबकि दोनों दुकानों पर व्यवसाय चल रहा है। इससे यह सवाल उठता है कि, क्या शासकीय जमीन का उपयोग नियमों के अनुसार किया जा रहा है या नहीं ? एक कहावत है कि, ‘‘पैसे के बल पर क्या नहीं हो सकता है’’ ? इससे यह प्रतीत होता है कि, पैसे का प्रभाव इस मामले में भी देखने को मिल रहा है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि, क्या प्रशासन इस मामले में कोई कार्रवाई करेगा और सुनिश्चित करेगा कि, शासकीय जमीन का उपयोग नियमों के अनुसार किया जाए।

लिली बिरयानी दुकान पर उठ रहे सवाल

बताया जा रहा है कि, लिली बिरयानी दुकान के आसपास के लोगों में काफी चर्चा है कि इस दुकान से इतनी बदबू फैल रही है कि कभी भी डायरिया और हैजा जैसी बीमारियों का माहौल बन सकता है। लोगों का कहना है कि, इस दुकान का परमिशन पशु चिकित्सालय, खाद्य विभाग और नगर पालिक की अनुमति के बिना नहीं दिया जा सकता था। क्या दुकान संचालक ने आवश्यक अनुमति प्राप्त की है या नहीं ? लोगों ने यह भी बताया है कि, शासकीय जमीन अपने उपयोग के लिए नहीं दी जाती है, लेकिन जमीन देने वाले ने इसे किराये पर उठाया है। यह एक गंभीर मुद्दा है जिस पर प्रशासन को ध्यान देना चाहिए।

नगर पालिका पर आरोप

जानकार सूत्रों के अनुसार, नगर पालिका पर आरोप है कि, वह बाहर से आने वाले लोगों को सहयोग कर रही है और एक ही समाज को बढ़ावा दे रही है। इससे समाज में तनाव और विवाद की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। यही नहीं कोरिया कलेक्टर ने मीट-मटन दुकानों को एक जगह खोलने के निर्देश दिए हैं, लेकिन नगर पालिका इसका पालन नहीं कर रही है। इससे लगता है कि, नगर पालिका के पास कोई स्पष्ट नीति नहीं है या वह अपने अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन कर रही है। साथ ही नगर पालिका दुकानों के परिषर में बिरयानी की दुकानें खोली गई हैं। इससे लोगों में चर्चा है कि, नगर पालिका का संरक्षण प्राप्त है और एक ही समाज को बढ़ावा दिया जा रहा है। लोगों का कहना है कि, इस मामले में पारदर्शिता और निष्पक्षता की आवश्यकता है, ताकि शासकीय योजनाओं का लाभ वास्तविक हितग्राहियों तक पहुंच सके। यह समाचार आम जनता के विचारधाराओं द्वारा प्रकाशित किया जा रहा है।

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