छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार के कई मामले सामने आते रहते हैं, जिसमें से जिला मुख्यालय बैकुण्ठपुर भी इससे अछूता नहीं है।
बैकुण्ठपुर में पत्रकारों की कार्यशैली पर सवाल
मिली जानकारी के अनुसार, बैकुण्ठपुर जिला मुख्यालय में पत्रकारों की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। बताया जा रहा है कि, कुछ पत्रकार पैसे के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं और वसूली के नाम पर धन और कार जैसी सुविधाएं मांगते हैं। साथ ही कुछ पत्रकार तो ऐसे भी है जो कि सूचना के अधिकार और धमकी देकर पैसे वसूलते हैं। यही नहीं वे गुट बनाकर या समूह बनाकर ऐसा करते हैं और प्रशासन की झूठी वाहवाही भी करते हैं। जिससे पत्रकारिता की गरिमा और नैतिकता पर सवाल उठ रहे हैं जब कुछ पत्रकार अपने पेशे का दुरुपयोग करते हैं और पैसे के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। यह पत्रकारिता के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है और समाज में गलत संदेश जाता है। वहीं लोगों का कहना है कि, पत्रकारिता एक जिम्मेदार पेशा है और पत्रकारों को अपनी जिम्मेदारी को समझना चाहिए। उन्हें समाज के लिए काम करना चाहिए और सच को उजागर करना चाहिए, न कि अपने स्वार्थ के लिए काम करना चाहिए।
एक नजर नगर पालिका के कार्यो पर
प्राप्त जानकारी के अनुसार, बैकुण्ठपुर में नगर पालिका के अध्यक्ष और कुछ व्यक्तियों द्वारा सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा करने और दुकानों को किराये पर देने की बात कही जा रही हैं। साथ ही वे पैसे देकर लीज और पट्टा बनवाकर दुकानों को किराये पर दे रहे हैं और मीट-मटन की बिक्री करा रहे हैं। इससे सनातन धर्म के लोगों पर भी इसका प्रभाव पड़ रहा है। इन दुकानों में बताया जा रहा है कि, लगभग 20 लाख रूपये एडवांस में व 25 हजार रूपये हर महीना किराया दिया जा रहा है। यहां तक कि, सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जा करके उसको दुकानें बनाकर किराये पर दिया जा रहा है। यही नहीं नगर पालिका द्वारा स्थानीय निवासियों को उजाड़ने के लिए नोटिस बांटकर बाहर के लोगों को बसाया जा रहा है। और गरीबों के संबंध में सीएमओ द्वारा कोई संतोषजनक बात नहीं किया गया। क्या प्रशासन पर राजनीतिक दबाव है या पैसे का खेल ?
प्रशासन को इन आरोपों की जांच करनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। साथ ही, स्थानीय लोगों के हितों की रक्षा करना और सरकारी जमीन का सही तरीके से उपयोग सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। यह समाचार आम जनता के विचारधाराओं द्वारा प्रकाशित किया जा रहा है।


