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एमसीबी/CG : युक्तियुक्तकरण से सुधरी शिक्षा व्यवस्था, एकल शिक्षकों की समर्पण भावना बनी प्रेरणा…………

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एमसीबी : शिक्षा विभाग द्वारा हाल ही में किए गए युक्तियुक्तकरण के प्रभाव से विकासखंड मनेंद्रगढ़ की शिक्षा व्यवस्था में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिल रहा है। जिला शिक्षा विभाग ने एकल शिक्षकीय, रिक्त शिक्षकीय एवं शिक्षक विहीन प्राथमिक शालाओं की सूची जारी करते हुए यह स्पष्ट किया है कि अब शिक्षक अपने कर्तव्यों का निर्वहन और भी व्यवस्थित रूप से कर पा रहे हैं। विकासखंड की कई प्राथमिक शालाएं ऐसी हैं, जहां मात्र एक शिक्षक पदस्थ हैं, फिर भी वे पूरे समर्पण और कर्मठता के साथ विद्यालय संचालन की सभी जिम्मेदारियों को निभा रहे हैं। ई संवर्ग के अंतर्गत प्राथमिक शाला डिहुली और प्राथमिक शाला शिवपुर इसके जीवंत उदाहरण हैं। इन विद्यालयों में पदस्थ शिक्षकों ने न केवल शिक्षण कार्य को सफलतापूर्वक अंजाम दिया, बल्कि प्रशासनिक कार्यों, विद्यार्थियों की गतिविधियों, मध्यान्ह भोजन योजना और स्कूल प्रबंधन जैसी सभी जिम्मेदारियों को भी प्रभावी रूप से निभाया। इसी प्रकार टी संवर्ग के शिक्षक भी किसी से पीछे नहीं हैं। विकासखंड मनेंद्रगढ़ के अंतर्गत टी संवर्ग की एकल शिक्षकीय प्राथमिक शालाएं हर्रीटोला, सलवा, वाही, नवाडीह, महराजपुर, डोंगरीपारा, छापरपारा, मटियारीऔरा, रेराधारा, गुडरूपारा, धरमपुर, मगाई, दुलकू, चक्काडांड, डंगौरा, चनवारीडांड, बोदरीटोला, मुड़धोवा, सरौला, मुख्तियारपारा और स्टेशनपारा इन सभी विद्यालयों में शिक्षक बहुआयामी भूमिका निभा रहे हैं। ये शिक्षक पढ़ाई के साथ-साथ विद्यालय की अन्य सभी गतिविधियों का दायित्व भी पूरी निष्ठा से उठा रहे हैं। विकासखंड मनेंद्रगढ़ में युक्तियुक्तकरण के पश्चात ई संवर्ग की रिक्त शिक्षकीय शालाएं प्राथमिक शाला लोहारी (बरबसपुर) और बुंदेली चिन्हित की गई हैं। वहीं टी संवर्ग की रिक्त शालाओं में प्राथमिक शाला फाटपानी, शंकरगढ़, कोथारी, प्राथमिक आश्रम शाला ताराबहरा, छिपछिपी, बौरीडांड और साल्ही शामिल हैं। विशेष उल्लेखनीय तथ्य यह है कि अब विकासखंड मनेंद्रगढ़ में ई संवर्ग की कोई भी शिक्षक विहीन शाला नहीं रह गई है, जबकि टी संवर्ग में मात्र एक विद्यालय प्राथमिक शाला खरला शिक्षक विहीन है। यह संपूर्ण परिवर्तन युक्तियुक्तकरण की नीति का परिणाम है, जिसके माध्यम से शिक्षा विभाग ने शिक्षकों की पदस्थापना को न्यायसंगत और आवश्यकता आधारित बनाया है। इससे न केवल विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ी है, बल्कि एकल शिक्षक भी अपने कार्य को मिशन मानकर निष्कलंक सेवा भावना के साथ निभा रहे हैं। अब आवश्यकता है कि शासन-प्रशासन ऐसे समर्पित शिक्षकों को आवश्यक संसाधनों से सशक्त बनाए, ताकि ये विद्यालय और अधिक प्रगति कर सकें।

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