चिरमिरी में बीमा घोटाले ने पूर्व नगर सरकार की पोल खोल दी है। आरोप है कि पूर्व नगर सरकार ने विकास की आड़ में बड़ा घपला किया और बीमा के नाम पर लाखों रुपये का गबन किया।
मिली जानकारी के अनुसार, पूर्व नगर सरकार पर आरोप है कि उन्होंने बीमा के नाम पर लाखों रुपये का गबन किया। और पूर्व पार्षदों और अधिकारियों ने मिलीभगत कर इस घोटाले को अंजाम दिया।
आरटीआई कार्यकर्ता राकेश सिंह की जांच में सामने आया है कि, निगम की गाड़ियों का बीमा पिछले चार सालों तक फर्जी दस्तावेजों के आधार पर दिखाया गया है, उनके पास न ही पाॅलिसी नंबर थे, न ही बीमा कंपनी का नाम और न ही बारकोड असली था। इसका पूरा देख-रेख कांग्रेस शासित सरकार के अधीन थी, जहां महापौर पद पर कंचन जायसवाल और विधायक के रूप में उनके पति विनय जायसवाल का वर्चस्व था। बड़ी विडम्बना की बात है, जब चार सालों तक एक ही फर्म मंजिता ई-सेल्युशन सीएससी सेंटर को गाड़ियों का बीमा सौंपा जाता रहा, और दस्तावेजों की कभी भी वैधता की जांच नही की गई, तो क्या यह सब कुछ जानबूझकर नहीं दिया गया ? या इसके पीछे कुछ और वजह है ? यह जांच का विषय है।

अब देखना यह है कि जांच एजेंसियां इस मामले में क्या कार्रवाई करती हैं और दोषियों को कितनी सजा मिलती है। इस घोटाले ने चिरमिरी की पूर्व नगर सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।



