Home छत्तीसगढ़ छत्तीसगढ़ में सरकारी कार्यालयों में दिखी लापरवाही, अधिकारियों की अनुपस्थिति में सुशासन...

छत्तीसगढ़ में सरकारी कार्यालयों में दिखी लापरवाही, अधिकारियों की अनुपस्थिति में सुशासन तिहार का क्या मतलब ?………

78
0

छत्तीसगढ़ राज्य में हर साल अलग-अलग नामों से आयोजन होते रहते है जो कि इस साल सुशासन तिहार के नाम पर आयोजन चल रहा है। सुशासन तिहार का उद्देश्य सरकारी कार्यालयों में पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देना है, लेकिन छत्तीसगढ़ में इसका उल्टा देखने को मिला। अधिकारी अपने कार्यालयों से नदारद थे, और सुशासन तिहार के नाम पर खाली मजाक उड़ाया जा रहा है। जो कि सुशासन तिहार नाम का बोझ राज्य शासन पर पड़ रहा है। जिसमें छत्तीसगढ़ के हर जिले के कलेक्टर भी एक्टिव नहीं है। जानकार सूत्र बताते है कि, खाली सुशासन के नाम पर कुछ लोग छत्तीसगढ़ से बाहर की यात्रा कर रहे है। और कुछ लोग नैनिताल घुम रहे है। ऐसे में शासन के पैसे का दोहन हो रहा है। यह एक सुशासन तिहार नहीं कुशासन तिहार बन चुका है।

मिली जानकारी के अनुसार, छत्तीसगढ़ में भ्रमण करने के दौरान स्वास्थ्य विभाग के कुछ बीएमओ इस तरीके से बात करते है कि, हम लोग स्वास्थ्य विभाग में अपने पाॅकिट से 40-45 लाख खर्च कर चुके है। जैसे- शंकरगढ़ बीएमओ के द्वारा बताया गया कि, हम सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र को कर्ज में चला रहे है जिसमें से एक व्यक्ति ऐसा भी है जो स्वास्थ्य मंत्री का भांजा बनता है। यहां तो छत्तीसगढ़ के सभी जायसवाल समाज स्वास्थ्य मंत्री के रिस्तेदार बन चुके है। यह मालूम नहीं पड़ता है कि, शंकरगढ़ के बीएमओ को कितना वेतन मिलता है जो कि लाखों रूपये स्वास्थ्य केन्द्र में लगा रहे है यह जांच का विषय है।

लोगों में चर्चा है कि, सरकारी कार्यालयों में अधिकारियों की अनुपस्थिति ने सुशासन तिहार के उद्देश्य को ही कमजोर कर दिया। लोगों का कहना है कि जब अधिकारी ही अपने कार्यालयों में नहीं होंगे, तो सुशासन तिहार का क्या मतलब रह जाता है? आम जनता को इस आयोजन से काफी उम्मीदें थीं, लेकिन अधिकारियों की अनुपस्थिति ने उनकी परेशानी बढ़ा दी। लोगों का कहना है कि, उन्हें अपने कामों के लिए कई चक्कर लगाने पड़ते हैं, और जब अधिकारी ही नहीं होंगे, तो काम कैसे होगा? अब सवाल यह है कि प्रशासन अपनी जवाबदेही कैसे सुनिश्चित करेगा? सुशासन तिहार के दिन अधिकारियों की अनुपस्थिति ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

इसी प्रकार छत्तीसगढ़ में हर विभाग को देखा जाये तो कुछ अधिकारी कर्मचारी सुशासन तिहार का मजाक उड़ा रहे है क्योंकि कुछ पीड़ित लोग पूर्व में भी पीड़ित थे और आज भी पीड़ित है। जबकि सुशासन तिहार में हर अधिकारी को सजक होना चाहिए, पर ऐसे-ऐसे कुछ अधिकारी है जिसमें से तहसीलदार और एसडीएम अपने मोबाईलों को बंद रखते है। जैसे दिनांक 22/05/2025 को शंकरगढ़ के तहसीलदार को फोन लगाया गया तो फोन बंद बताया गया। इन सब को देखते हुए लोगों में चर्चा है कि, जब तक छत्तीसगढ़ के मुख्या माननीय मुख्यमंत्री अधिकारियों के ऊपर कड़ी कार्यवाही नहीं करेगें, तब तक सुशासन तिहार कागजों में ही रह जायेगा।

आगे की कार्रवाई
अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है। क्या प्रशासन अधिकारियों की अनुपस्थिति के लिए कोई जवाबदेही तय करेगा या नहीं? यह एक बड़ा सवाल है? जिसका जवाब आने वाले दिनों में मिलेगा।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here