जिला मुख्यालय के नगरपालिका में पार्षदों द्वारा बाहरी लोगों का राशन कार्ड बनवाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि, पार्षद अपने चहेतों और बाहरी लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए नियमों को ताक पर रखकर राशन कार्ड बना रहे हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पुलिस के देख-रेख में बाहर के लोगों पर नजर-अंदाज किया जा रहा है। जो कि पुलिस के यहां मुसाफरी में बाहर से आने वालों का डायरी मेंटेन होना चाहिए, पर पुलिस भी बाहरी लोगों की जांच नहीं कर रही है। लोगों में चर्चाऐं है कि, पार्षद अपने समाज के लोगों का राशन कार्ड बनवा रहे है चाहे वह बाहरी नागरिक क्यों न हो। लोगों में चर्चाऐं है कि, एक ही परिवार का खालू-चालू-मालू एवं अन्य नामों का उल्लेख किया गया है। ऐसा लगता है कि, बैकुण्ठपुर में बाहरी लोगों के द्वारा कहीं भी किसी प्रकार का दुर्घटना को अंजाम दिया जा सकता है। क्या पटवारी, नगर पालिका बाबू और खाद्य विभाग दबाव में राशन कार्ड बनवा रहे है ? सोचने वाली बात है कि, ऐसा कौन सा राज्य है जहां से लोग भाग-भागकर बैकुण्ठपुर में बस रहे है ? जानकार सूत्र बताते है कि, नगर पालिका सीएमओ और अध्यक्षपति अपने अध्यक्ष पद का दरूपयोग कर रहे है। और नगर पालिका में भ्रष्टाचार को बढ़ावा देकर नियमों की खुलेआम धज्जियां उठाई जा रही है। पर कोरिया प्रशासन नजर-अंदाज किये हुए है। लोगों का कहना है कि, इस संबंधों को लेकर पुलिस विभाग को आगह किया जाता है तो पुलिस विभाग तो किसी भी व्यक्ति का शिकायत तभी सुनता है जब पैसे मिलते है।
नगरपालिका में पार्षदों की मनमानी के खिलाफ आवाज उठाना पत्रकारिता का एक महत्वपूर्ण पहलू है। पत्रकारिता के माध्यम से इस मुद्दे को उजागर करने से न केवल पार्षदों की मनमानी को रोकने में मदद मिल सकती है, बल्कि नगरपालिका में पारदर्शिता और जवाबदेही को भी बढ़ावा मिल सकता है। परंतु पत्रकारिता को तार-तार करने वाले अवैध बिजनेस करने वाले को पत्रकार सुरक्षा कानून का चिंता लगा हुआ है क्योंकि जहां कानून लागू हुआ तो पत्रकारिता के नाम पर खुलेआम अवैध कारोबार चालू हो जायेंगे। जैसे- अभी पत्रकारिता के आड़ में पोर्टल वाले बिल में से चूहा निकलते है वैसे ही पत्रकारिता के नाम पर व्यवपार जमाये हुए है। वहीं एक परिवार ऐसा भी है जो कि अपने बाप, बेटे, लड़का और पत्नी सभी पत्रकारिता में जुड़े हुए है। इसका भी सुरक्षा कानून का नियम, सीमा या योग्यता होना अति आवश्यक है। जैसे- अनपढ़ व्यक्ति, अंधे लोग एवं कोंदा ऐ सभी लोग पत्रकारिता के श्रेणी में आ चुके है क्योंकि इन्हीं लोगों का बोलबाला है। यह लोग समूह बना-बनाकर अधिकारियों को निशाना साधे हुए है यहां तक कि, कलेक्टर एवं एसपी के साथ चापलूसी में लगे हुए है। यह समाचार आम जनता के विचारधाराओं द्वारा प्रकाशित किया जा रहा है।


