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सरगुजा, राशन वितरण में अनियमितता का आरोप, उचित मूल्य दुकान की जांच की मांग हितग्राहियों ने एसडीएम से की शिकायत, स्टॉक व वितरण रजिस्टर के साथ ई-पॉस मशीन के रिकॉर्ड की जांच की उठी मांग

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सरगुजा उदयपुर तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत खोंडरी स्थित शासकीय उचित मूल्य दुकान क्रमांक 392005048 में चावल वितरण को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं।

मामले को लेकर ग्राम पंचायत के निवासियों ने अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), उदयपुर को लिखित शिकायत सौंपते हुए दुकान का तत्काल निरीक्षण कर निष्पक्ष जांच और आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।

शिकायत के अनुसार उक्त शासकीय उचित मूल्य दुकान का संचालन किरण स्वयं सहायता समूह द्वारा किया जा रहा है।

ग्रामीणों का आरोप है कि दुकान में निर्धारित मात्रा में चावल उपलब्ध कराने और वितरण की प्रक्रिया को लेकर अनियमितताएं सामने आ रही हैं। शिकायतकर्ताओं ने वितरण एवं स्टॉक के रिकॉर्ड में भी गड़बड़ी की आशंका जताई है।

शिकायत में विशेष रूप से आरोप लगाया गया है कि कुछ मामलों में हितग्राहियों के राशन कार्ड पर अंगूठा लगवाए जाने के बावजूद चावल का वितरण नहीं किए जाने की बात सामने आई है।

यदि शिकायत की पुष्टि होती है तो इससे पात्र एवं गरीब हितग्राहियों को उनके खाद्यान्न अधिकार से वंचित किए जाने का गंभीर मामला बन सकता है।

स्टॉक और रिकॉर्ड का भौतिक सत्यापन कराने की मांग

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि उचित मूल्य दुकान का अचानक निरीक्षण एवं भौतिक सत्यापन कराया जाए।

इसके साथ ही दुकान के स्टॉक रजिस्टर, वितरण रजिस्टर, ई-पॉस मशीन से संबंधित रिकॉर्ड तथा मौके पर उपलब्ध वास्तविक चावल के स्टॉक का आपस में मिलान कराया जाए।

शिकायतकर्ताओं का कहना है कि दस्तावेजों में दर्ज मात्रा और दुकान में मौजूद वास्तविक खाद्यान्न के बीच अंतर होने की स्थिति में उसकी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।

साथ ही ई-पॉस मशीन में दर्ज वितरण और वास्तविक हितग्राहियों को किए गए वितरण का भी सत्यापन किए जाने की मांग की गई है।

निष्पक्ष जांच से सामने आ सकता है पूरा सच

ग्रामीणों ने एसडीएम से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर शिकायतकर्ताओं एवं प्रभावित हितग्राहियों को जांच के परिणाम और की गई कार्रवाई से अवगत कराने का आग्रह किया है।

अब प्रशासनिक जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि शिकायत में लगाए गए आरोप कितने सही हैं और राशन वितरण व्यवस्था में वास्तव में कोई अनियमितता हुई है या नहीं।

यह शिकायत ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों पर आधारित है। आरोपों की स्वतंत्र प्रशासनिक जांच एवं संबंधित विभाग का पक्ष सामने आने के बाद ही अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी।

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