बिलासपुर गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव श्याम सिंह मरकाम का सार्वजनिक जीवन आदिवासी समाज के अधिकारों, सामाजिक न्याय, जनसेवा और संगठन निर्माण से जुड़ी सक्रियता के लिए पहचाना जाता है।
पार्टी संगठन में राष्ट्रीय स्तर की जिम्मेदारी संभालते हुए वे आदिवासी समाज के बीच राजनीतिक जागरूकता और अधिकारों से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाने का प्रयास करते रहे हैं।
श्याम सिंह मरकाम की राजनीति का केंद्र केवल सत्ता और चुनाव नहीं, बल्कि गांव, गरीब, किसान, आदिवासी और वंचित वर्गों से जुड़े बुनियादी सवाल हैं।

जल, जंगल और जमीन पर अधिकार, वनाधिकार, शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य, सड़क, मूलभूत सुविधाएं और आदिवासी समाज की सम्मानजनक हिस्सेदारी जैसे विषय उनके सार्वजनिक सरोकारों में प्रमुखता से दिखाई देते हैं।
आदिवासी स्वाभिमान को राजनीतिक आवाज देने का प्रयास आदिवासी समाज के सामने आज भी विकास और अधिकारों से जुड़े अनेक प्रश्न मौजूद हैं।
ऐसे समय में श्याम सिंह मरकाम लगातार संगठन और समाज के बीच संवाद स्थापित करने तथा स्थानीय समस्याओं को व्यापक राजनीतिक मंच तक पहुंचाने की दिशा में सक्रिय दिखाई देते हैं।
उनका मानना रहा है कि आदिवासी समाज के विकास की वास्तविक तस्वीर तभी बदलेगी, जब गांवों की समस्याओं को गांव की आवाज के साथ समझा जाएगा। इसी सोच के साथ वे संगठन के कार्यकर्ताओं और आम लोगों के बीच पहुंचकर सामाजिक एवं जनहित के मुद्दों पर संवाद को महत्व देते हैं।
संगठन को मजबूत करने पर जोर
गोंडवाना गणतंत्र पार्टी में राष्ट्रीय महासचिव के रूप में श्याम सिंह मरकाम की भूमिका संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने से भी जुड़ी है।
कार्यकर्ताओं को जोड़ना, समाज के युवाओं को राजनीतिक और सामाजिक रूप से जागरूक करना तथा आदिवासी समाज की समस्याओं को संगठित आवाज देना उनके प्रयासों का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
उनकी कार्यशैली में संगठन को केवल चुनावी गतिविधियों तक सीमित रखने के बजाय सामाजिक सरोकारों से जोड़ने पर जोर दिखाई देता है। यही वजह है कि पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच उनका प्रभाव एक संगठनात्मक नेतृत्वकर्ता के रूप में भी देखा जाता है।
जनसेवा को राजनीति का आधार बनाने की पहल
श्याम सिंह मरकाम का सार्वजनिक जीवन इस बात पर जोर देता है कि राजनीति का उद्देश्य केवल पद प्राप्त करना नहीं, बल्कि समाज की समस्याओं को सामने लाना और जरूरतमंद लोगों की आवाज बनना होना चाहिए। ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य, सड़क और सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन जैसे विषयों को लेकर जनजागरूकता पैदा करना इसी दृष्टिकोण का हिस्सा है।
तुलेश्वर सिंह मरकाम की विचारधारा और संगठनात्मक भूमिका का भी उल्लेख
गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष तुलेश्वर सिंह मरकाम के नेतृत्व में पार्टी आदिवासी समाज की राजनीतिक और सामाजिक भागीदारी को मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है।
संगठन के राष्ट्रीय स्तर पर श्याम सिंह मरकाम जैसे नेताओं की सक्रियता पार्टी की विचारधारा को जमीनी स्तर तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
तुलेश्वर सिंह मरकाम के नेतृत्व में पार्टी द्वारा आदिवासी समाज के अधिकार, सम्मान और हिस्सेदारी से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बनाने पर जोर दिया जाता रहा है।
इसी व्यापक संगठनात्मक दिशा के साथ श्याम सिंह मरकाम विभिन्न क्षेत्रों में कार्यकर्ताओं और समाज के लोगों के बीच संवाद को आगे बढ़ाने में सक्रिय हैं।
युवाओं को जोड़ने की चुनौती और नई उम्मीद
आदिवासी समाज की नई पीढ़ी के सामने शिक्षा, रोजगार और बेहतर अवसर सबसे बड़ी चुनौतियों में शामिल हैं। श्याम सिंह मरकाम का जोर युवाओं को सामाजिक चेतना और लोकतांत्रिक भागीदारी से जोड़ने पर भी है।
उनका संदेश यही है कि समाज की युवा शक्ति अपने अधिकारों को समझे और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज मजबूत करे।
“जिसकी माटी, उसका अधिकार” की भावना
आदिवासी समाज के लिए जमीन केवल संपत्ति नहीं, बल्कि संस्कृति, परंपरा और जीवन से जुड़ी पहचान है। इसी भावना से “जिसकी माटी, उसका अधिकार” जैसे विचार आदिवासी स्वाभिमान की लड़ाई को मजबूती देते हैं।
कुल मिलाकर, गोंडवाना गणतंत्र पार्टी की राजनीति में तुलेश्वर सिंह मरकाम का राष्ट्रीय नेतृत्व और श्याम सिंह मरकाम की संगठनात्मक सक्रियता आदिवासी अधिकारों, सामाजिक न्याय और जनसेवा के मुद्दों को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में सामने आती है। आने वाले समय में आदिवासी समाज की नई पीढ़ी, संगठन विस्तार और जमीनी जनसमस्याओं को लेकर श्याम सिंह मरकाम की सक्रिय भूमिका पर लोगों की नजर बनी रहेगी।

