बैकुण्ठपुर। जिला मुख्यालय बैकुण्ठपुर में रेशम विभाग के उपसंचालक एस.एन. सिंह पदस्थ हैं। उनके पास तीन जिलों का प्रभार होने के बावजूद वे अधिकांश समय कार्यालय से अनुपस्थित रहते हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार, उन्हें किसी एक जिले में नियमित रूप से उपलब्ध पाना कठिन है। सूरजपुर में उनकी जानकारी लेने पर बैकुण्ठपुर में होने की बात कही जाती है, जबकि बैकुण्ठपुर में पूछताछ करने पर उनके अम्बिकापुर में होने की सूचना दी जाती है। ऐसे में विभाग का संचालन मुख्यतः बाबुओं के भरोसे चल रहा है। आरोप है कि कार्यालयीन कार्यवाही कागजी प्रक्रियाओं तक सीमित होकर रह गई है, जिससे विभागीय कार्यों के निष्पादन पर भी प्रश्नचिह्न खड़े हो रहे हैं। जानकार सूत्रों के अनुसार, विभाग के कुछ बाबुओं के पास बिल बुक होने की बात कही जा रही है। आरोप है कि उक्त बिल बुक का उपयोग कर कथित रूप से फर्जी बिल प्रस्तुत किए जा रहे हैं और उनके माध्यम से राशि निकाली जा रही है। आरोप है कि उपसंचालक को फोन करने पर भी वे बातचीत करने के लिए उपलब्ध नहीं होते। ऐसे में कई सवाल खड़े हो रहे हैं। बैकुण्ठपुर और अम्बिकापुर के बीच लगभग 90 किलोमीटर की दूरी है, जिसके कारण उनके नियमित आवागमन और कार्यालयीन उपस्थिति को लेकर भी चर्चा का विषय बना हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस संबंध में स्थिति स्पष्ट होना आवश्यक है।
इसी प्रकार बैकुण्ठपुर स्थित मत्स्य विभाग की स्थिति भी चिंताजनक बताई जा रही है। विभाग में पदस्थ उपसंचालक का कार्यालय में नियमित रूप से उपस्थित न रहना चर्चा का विषय बना हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वे अधिकांश समय अम्बिकापुर में रहते हैं, जबकि बैकुण्ठपुर कार्यालय का संचालन मुख्यतः बाबुओं के भरोसे चलता है। आरोप है कि उपसंचालक वर्षों से नियमित रूप से कार्यालय में नहीं बैठते और केवल आवश्यक औपचारिकताओं के लिए ही आते हैं। विभाग में जिम्मेदार अधिकारियों की अनुपस्थिति के कारण खरीदी-बिक्री सहित कई प्रशासनिक कार्य बाबुओं के भरोसे संचालित होने की बात कही जा रही है। कुछ लोगों का आरोप है कि बिल बुक के माध्यम से कथित तौर पर फर्जी बिल लगाकर राशि निकाली जाती है। वहीं, विभागीय कार्यों एवं वित्तीय मामलों से संबंधित जानकारी मांगे जाने पर टालमटोल किए जाने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। यह जांच का विषय है कि मत्स्य विभाग में कार्यालयीन समय के दौरान कर्मचारियों द्वारा केवल कागजी औपचारिकताएं पूरी किए जाने की चर्चा क्यों बनी हुई है। कर्मचारियों से अधिकारियों की उपस्थिति अथवा उनके कार्यालय आने के संबंध में जानकारी मांगी जाती है, तो कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिल पाता। ऐसे में विभागीय कार्यप्रणाली और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर कई प्रश्न उठ रहे हैं, जो जांच का विषय प्रतीत होते हैं।

