— विशेष समाचार | गणेश सोनी, सिटी रिपोर्टर, वशिष्ठ टाइम्स
शहडोल (मध्यप्रदेश):
शहडोल जिले के सोहागपुर क्षेत्र अंतर्गत बंगवार भूमिगत कोयला खदान में हुए दर्दनाक हादसे के बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया। South Eastern Coalfields Limited (SECL) की खदान में रूफ स्लाइडिंग के दौरान दो ठेका मजदूरों की मौत के बाद आक्रोशित परिजनों और स्थानीय लोगों ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया।
घटना से नाराज भीड़ ने मैनेजर ऑफिस में घुसकर तोड़फोड़ की, दरवाजों पर लात मारकर उन्हें तोड़ने का प्रयास किया और कुर्सियां तोड़ दीं। मौके पर मौजूद पुलिस बल ने किसी तरह स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया, लेकिन काफी देर तक हंगामे की स्थिति बनी रही।
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प्रदर्शन में लगे नारे, जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग
प्रदर्शनकारियों ने SECL जीएम और ठेकेदार के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए “मुर्दाबाद” के नारे लगाए। उनका आरोप है कि खदान में सुरक्षा मानकों की घोर अनदेखी की जा रही थी, जिसके कारण यह हादसा हुआ।
स्थानीय लोगों का कहना है कि:
> “अगर समय रहते सुरक्षा उपाय किए गए होते, तो मजदूरों की जान नहीं जाती।”
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प्रशासन और जनप्रतिनिधियों पर बढ़ा दबाव
घटना के बाद जिला प्रशासन, स्थानीय कलेक्टर, विधायक और सांसद की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। क्षेत्रीय जनता ने मांग की है कि:
हादसे की निष्पक्ष जांच कराई जाए
दोषी अधिकारियों और ठेकेदार पर कड़ी कार्रवाई हो
मृतक मजदूरों के परिवारों को उचित मुआवजा और नौकरी दी जाए
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पुलिस और प्रशासन मौके पर तैनात
स्थिति को देखते हुए पुलिस बल मौके पर तैनात है और हालात को नियंत्रित करने की कोशिश की जा रही है। प्रशासनिक अधिकारियों ने लोगों को शांत करने और उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
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राष्ट्रीय स्तर पर उठ सकता है मामला
यह घटना केवल एक स्थानीय हादसा नहीं, बल्कि देशभर की खदानों में सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल है। लगातार हो रहे ऐसे हादसे यह संकेत देते हैं कि ठेका श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर लापरवाही बरती जा रही है।
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बंगवार खदान हादसा एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करता है कि विकास और उत्पादन की दौड़ में मजदूरों की जान कितनी सुरक्षित है। यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो ऐसे हादसे और बढ़ सकते हैं।

