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कोरिया (छत्तीसगढ़)-“50 फीट गहरे ‘मौत के कुएं’ से पानी पीने को मजबूर ग्रामीण: कोरिया जिले की ग्राम पंचायत बेलिया में ‘हर घर जल’ योजना की खुली पोल”नलों पर बंधीं बकरियां, सूखे स्रोत—गर्मी में प्यास से जूझ रहे ग्रामीण; पंचायत और विभागीय व्यवस्था पर गंभीर सवाल…………..

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Report Nilesh sony
कोरिया (छत्तीसगढ़)।

जिले की ग्राम पंचायत बेलिया से सामने आई तस्वीरें सरकारी दावों की सच्चाई उजागर कर रही हैं। जहां एक ओर “हर घर जल” योजना के तहत हर घर तक पानी पहुंचाने के दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर बेलिया के ग्रामीण लगभग 50 फीट गहरे खतरनाक कुएं से पानी निकालकर अपनी प्यास बुझाने को मजबूर हैं।

स्थिति इतनी भयावह है कि इस कुएं को ग्रामीणों ने “मौत का कुआं” नाम दे दिया है। बिना सुरक्षा के गहराई में उतरकर पानी निकालना न केवल जोखिम भरा है, बल्कि कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।

हैरानी की बात यह है कि गांव में लगाए गए नल पूरी तरह बेकार पड़े हैं—यहां तक कि कुछ स्थानों पर नलों पर बकरियां बंधी देखी गईं, जो इस बात का प्रतीक है कि जल आपूर्ति व्यवस्था पूरी तरह ठप हो चुकी है।

पंचायत और विभाग पर गंभीर आरोप:

ग्रामीणों का आरोप है कि

– मूलभूत सुविधाओं एवं जल योजना के लिए आने वाली राशि का सही उपयोग नहीं किया गया
– पंचायत द्वारा जल संकट के समाधान के लिए कोई ठोस प्रयास नहीं किया गया

– विभागीय अधिकारी स्थिति से पूरी तरह अनजान या उदासीन बने हुए हैं

जवाबदेही तय करने की मांग:

ग्रामीणों ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए—

– जिला पंचायत कोरिया से तत्काल जांच की मांग की है
– जिला पंचायत CEO से जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है

– क्षेत्रीय विधायक Renuka Singh से हस्तक्षेप कर समाधान सुनिश्चित करने की अपील की है

गर्मी में संकट और बढ़ा:

भीषण गर्मी के बीच जलस्रोत सूखते जा रहे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि

अगर यही हाल रहा, तो आने वाले दिनों में ग्रामीण क्या करेंगे?

👉 क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?

ग्राम पंचायत बेलिया की यह स्थिति सिर्फ एक गांव की नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की विफलता का प्रतीक है।
यदि “हर घर जल” जैसी योजनाएं जमीन पर इस तरह दम तोड़ती रहीं, तो यह न केवल सरकारी संसाधनों की बर्बादी है, बल्कि आम जनता के साथ सीधा अन्याय भी है।

अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन और जिम्मेदार जनप्रतिनिधि इस “मौत के कुएं” को बंद कर सुरक्षित जल व्यवस्था कब तक सुनिश्चित करते हैं।

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