मुख्य खबर: Nilesh sony
सोनहत/कोरिया।
जिले के कछुआखोह क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं की बदहाल स्थिति एक बार फिर सामने आई है, जहां बैटरी सिस्टम पिछले लगभग दो महीनों से खराब पड़ा हुआ है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद अब तक न तो इसे ठीक किया गया है और न ही कोई वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराई गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने संबंधित विभाग को कई बार शिकायत दर्ज कराई, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन मिला—जमीन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
इससे यह साफ होता है कि विभागीय स्तर पर जवाबदेही और निगरानी पूरी तरह कमजोर पड़ चुकी है।
यह स्थिति न केवल प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाती है, बल्कि यह भी साबित करती है कि दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है।
जब एक छोटी सी तकनीकी खराबी को महीनों तक ठीक नहीं किया जा सकता, तो बड़ी योजनाओं के क्रियान्वयन की स्थिति क्या होगी—यह अपने आप में बड़ा सवाल है।
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सवाल:
– क्या शिकायतों का कोई रिकॉर्ड और फॉलो-अप सिस्टम मौजूद है?
– आखिर किस अधिकारी की जिम्मेदारी है इस व्यवस्था को दुरुस्त करना?
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– क्या विभाग केवल कागजों में ही सक्रिय है?
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ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि—
– तत्काल बैटरी सिस्टम को ठीक कराया जाए या नया सिस्टम उपलब्ध कराया जाए
– जिम्मेदार अधिकारियों/कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जाए
– भविष्य में ऐसी लापरवाही रोकने के लिए निगरानी तंत्र मजबूत किया जाए
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कछुआखोह की यह घटना सिर्फ एक तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि प्रशासनिक उदासीनता का प्रतीक बन चुकी है।
यदि समय रहते इस पर कड़ी कार्रवाई नहीं की गई, तो यह संदेश जाएगा कि दूरस्थ क्षेत्रों की समस्याएं प्रशासन के लिए कोई प्राथमिकता नहीं रखतीं।

