विशेष समाचार (बेनी माधव कुशवाहा डिस्ट्रिक्ट रिपोर्टर शहडोल)
शहडोल।
जिले की ग्राम पंचायत चितरांव में विकास कार्यों की स्थिति को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। आज़ादी के 78 वर्ष बाद भी ग्राम पंचायत चितरांव के ग्रामीण मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष करने को मजबूर हैं। ग्रामीणों और सूत्रों के अनुसार पंचायत में पदस्थ सचिव अतिरिक्त प्रभार में कार्य कर रहे हैं, जिसके कारण पंचायत के कार्य पूरी तरह प्रभावित हो रहे हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत में ना तो पेयजल की समुचित व्यवस्था है, ना ही बिजली व्यवस्था दुरुस्त है और ना ही गांव में नाली निर्माण कराया गया है। नाली नहीं होने के कारण गांव में गंदा पानी सड़कों और घरों के आसपास जमा हो रहा है, जिससे बीमारी फैलने का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। बरसात से पहले ही गांव की स्थिति बदहाल बनी हुई है।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि शासन द्वारा मिलने वाली 15वें वित्त आयोग एवं अन्य मदों की मूलभूत विकास राशि का उपयोग केवल कागज़ों में दिखाया जा रहा है, जबकि धरातल पर विकास कार्य दिखाई नहीं दे रहे। गांव की कई सड़कें जर्जर अवस्था में हैं और जगह-जगह गंदगी फैली हुई है। पंचायत भवन परिसर तक में साफ-सफाई का अभाव बताया जा रहा है।


स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम पंचायत के जनप्रतिनिधि और सचिव गांव के विकास के प्रति गंभीर नहीं हैं। ग्रामसभा के दौरान औपचारिक उपस्थिति दर्ज कर कार्यवाही पूरी कर ली जाती है, लेकिन ग्रामीण समस्याओं का समाधान नहीं किया जाता। गांव में जल निकासी, सड़क, स्वच्छता और पेयजल जैसी मूलभूत आवश्यकताएं आज भी अधूरी हैं।
ग्रामीणों ने जिला पंचायत शहडोल एवं संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों से मांग की है कि ग्राम पंचायत चितरांव की कार्यप्रणाली की निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार अधिकारियों और सचिव के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए। साथ ही स्थानीय विधायक से भी ग्रामीणों ने हस्तक्षेप कर गांव में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि शीघ्र ही समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो आने वाले समय में जनआंदोलन की स्थिति बन सकती है।
पंचायत में व्याप्त अव्यवस्थाओं को लेकर अब लोगों का भरोसा प्रशासनिक व्यवस्था से उठता दिखाई दे रहा है।

