खबर बेनी माधव कुशवाहा जिला रिपोर्टर शहडोल
जिला पंचायत, पीएचई/पीएचसी विभाग की निगरानी पर सवाल—ग्रामीणों को अब भी पानी के लिए जूझना पड़ रहा
शहडोल/जिला मुख्यालय से जुड़ा मामला—सरकार द्वारा संचालित जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत गांवों में जल संरक्षण और आपूर्ति को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं,
लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों से बिल्कुल अलग नजर आ रही है। विकासखंड क्षेत्र के ग्राम चितरांव में नल-जल योजना पूरी तरह फेल साबित हो रही है,
जहां घर-घर लगाए गए नलों में अब भी पानी नहीं पहुंच पा रहा।
ग्रामीणों के अनुसार, योजना के अंतर्गत पाइपलाइन बिछाने और ढांचागत कार्य तो किए गए, लेकिन नियमित जल आपूर्ति सुनिश्चित करने में संबंधित विभाग पूरी तरह असफल रहे हैं।
स्थिति यह है कि नलों की टूटियां सूखी पड़ी हैं और लोगों को पीने के पानी के लिए दूर-दराज के स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
प्रशासनिक स्तर पर देखें तो यह मामला जिला पंचायत, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) विभाग और मॉनिटरिंग पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी साफ दिखाई दे रही है।
जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा समय-समय पर निरीक्षण और समीक्षा न किए जाने के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है।
केवल योजनाओं की घोषणा और कागजी प्रगति दिखाने से ग्रामीणों की मूलभूत समस्याएं हल नहीं हो सकतीं।
जरूरत है कि जिला प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच कराए
, ताकि आम जनता को राहत मिल सके।
जल गंगा संवर्धन अभियान की सफलता तभी संभव है जब जमीनी स्तर पर योजनाओं का सही क्रियान्वयन हो।
ग्राम पंचायत चितरांव की स्थिति यह बताने के लिए काफी है कि अभी भी प्रशासनिक स्तर पर सुधार की सख्त जरूरत है।

