📍 विशेष रिपोर्ट | बेनी माधव कुशवाहा जिला रिपोर्टर
(मध्य प्रदेश)
ग्राम पंचायत दिया पीपर में
सरकार द्वारा स्वच्छता को बढ़ावा देने और ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बनाए गए सामुदायिक स्वच्छता परिसर कई जगहों पर केवल कागजों तक सीमित रह गए हैं।
ऐसा ही एक मामला ग्राम पंचायत दिया पीपर से सामने आया है, जहां लाखों की लागत से बना सामुदायिक स्वच्छता परिसर निर्माण के बाद से ही उपयोग में नहीं आ सका।


ग्रामीण सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, यह परिसर शुरू से ही बंद पड़ा हुआ है और आज खंडहर में तब्दील होता जा रहा है।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को खुले में शौच के लिए मजबूर होना पड़ रहा है, जिससे स्वास्थ्य और सुरक्षा दोनों पर गंभीर असर पड़ रहा है।
स्थल की स्थिति यह दर्शाती है कि रखरखाव और संचालन की जिम्मेदारी पूरी तरह से उपेक्षित रही है।
परिसर के दरवाजे बंद हैं, साफ-सफाई का अभाव है और आसपास गंदगी का अंबार लगा हुआ है।
इससे यह स्पष्ट होता है कि संबंधित विभाग और ग्राम पंचायत प्रशासन ने इस महत्वपूर्ण सुविधा के प्रति गंभीरता नहीं दिखाई।


ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत के सचिव और सरपंच की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि उन्होंने इस परिसर को चालू कराने के लिए कोई ठोस प्रयास नहीं किया।
केवल निर्माण कराना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि उसका नियमित संचालन और रखरखाव सुनिश्चित करना भी प्रशासन की जिम्मेदारी है।
यह मामला न केवल स्थानीय प्रशासन की कार्यशैली पर प्रश्नचिह्न लगाता है, स्वच्छता योजनाओं के क्रियान्वयन पर भी गंभीर चिंता पैदा करता है।
यदि समय रहते इस ओर ध्यान नहीं दिया गया, तो सरकारी योजनाएं केवल कागजी उपलब्धि बनकर रह जाएंगी।
ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप कर स्वच्छता परिसर को चालू कराने, नियमित सफाई व्यवस्था सुनिश्चित करने की करने की मांग की है।

