📍 विशेष रिपोर्ट | निलेश सोनी…..
छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में है।
बंसीपुर गांव में स्थापित सौर ऊर्जा पॉवर प्लांट पिछले 20 दिनों से बंद पड़ा है, जिससे पूरा गांव अंधेरे में डूबा हुआ है।
वहीं दूसरी ओर अमरा क्षेत्र में जल जीवन मिशन (JJM) पूरी तरह फेल साबित हो रहा है, जहां पंडो जनजाति के लोग पिछले दो महीनों से दूषित ढोढ़ी (तालाब/गड्ढे) का पानी पीने को मजबूर हैं।
⚡ सौर ऊर्जा परियोजना बनी शोपीस, जिम्मेदार बेखबर
बंसीपुर में लाखों रुपये खर्च कर लगाए गए सौर ऊर्जा संयंत्र का उद्देश्य ग्रामीणों को निर्बाध बिजली उपलब्ध कराना था, लेकिन यह योजना अब सिर्फ कागजों और उद्घाटन तक सीमित रह गई है।
ग्रामीणों के अनुसार, प्लांट के तकनीकी संचालन की जिम्मेदारी संभाल रहे टेक्नीशियन को अचानक काम से बाहर कर दिया गया, जिसके बाद से ही प्लांट बंद पड़ा है।

इस गंभीर लापरवाही के कारण:
गांव में रात होते ही घोर अंधकार छा जाता है
बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है
सुरक्षा और जनजीवन पर खतरा बढ़ गया है

इसके बावजूद संबंधित विभाग और प्रशासन पूरी तरह मौन और निष्क्रिय नजर आ रहे हैं।
🚱 जल जीवन मिशन की जमीनी हकीकत—‘हर घर जल’ सिर्फ नारा
अमरा क्षेत्र में स्थिति और भी भयावह है। यहां पंडो जनजाति, जिन्हें देश में विशेष रूप से संवेदनशील जनजाति (PVTG) का दर्जा प्राप्त है, आज भी मूलभूत सुविधा—स्वच्छ पानी—से वंचित हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि:
नल-जल योजना महीनों से ठप है
पाइपलाइन और स्रोतों का रखरखाव नहीं हो रहा
मजबूरी में लोग ढोढ़ी का गंदा पानी पीने को विवश हैं
यह स्थिति सीधे तौर पर जनस्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ और संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है।
⚠️ प्रशासनिक विफलता और विभागीय लापरवाही पर सवाल
दोनों ही मामलों में जो तस्वीर सामने आती है, वह बेहद चिंताजनक है—
योजनाओं के क्रियान्वयन में भारी भ्रष्टाचार या लापरवाही की आशंका
जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय नहीं
शिकायतों के बावजूद कोई त्वरित कार्रवाई नहीं
यह सवाल उठना लाजमी है कि जब केंद्र और राज्य सरकारें करोड़ों रुपये खर्च कर ग्रामीण विकास और बुनियादी सुविधाओं की बात करती हैं, तो जमीनी स्तर पर ये योजनाएं दम क्यों तोड़ रही हैं?
: जवाबदेही तय हो, तत्काल समाधान हो
ग्रामीणों ने मांग की है कि:
बंद पड़े सौर प्लांट को तत्काल चालू किया जाए
हटाए गए टेक्नीशियन की भूमिका की जांच हो
जल जीवन मिशन के तहत स्वच्छ पानी की आपूर्ति तत्काल बहाल हो
जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए
बंसीपुर और अमरा की यह तस्वीर सिर्फ एक गांव या क्षेत्र की नहीं, बल्कि उन तमाम ग्रामीण इलाकों की सच्चाई है जहां योजनाएं कागजों पर चमकती हैं, लेकिन जमीन पर दम तोड़ देती हैं।
यदि समय रहते प्रशासन नहीं जागा, तो यह समस्या केवल असुविधा नहीं, बल्कि मानवाधिकार संकट का रूप ले सकती है।

