Home छत्तीसगढ़ बिहान योजना से बदली तकदीर: सियामुनी राजवाड़े बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल….

बिहान योजना से बदली तकदीर: सियामुनी राजवाड़े बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल….

17
0
सफलता की कहानी –
सूरजपुर/15 अप्रैल 2026/    जिले के प्रेमनगर विकासखण्ड अंतर्गत ग्राम पंचायत महेशपुर की सियामुनी राजवाड़े आज अपने गाँव की महिलाओं के लिए प्रेरणा स्त्रोत बन चुकी है। कभी कृषि और दिहाड़ी मजदूरी पर निर्भर रहने वाली सिया मुनि की पहचान अब एक सफल व्यवसायी के रूप मंे हो चुकी है। यह बदलाव संभव हो पाया राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान‘ योजना की बदौलत।
                 स्वयं सहायता समूह में जुड़ने से पहले सियामुनी राजवाड़े दीदी का परिवार एक छोटा परिवार है जिसमें कुल 6 सदस्य है। उनकी आजीविका का मुख्य स्त्रोत कृषि कार्य, वनोपज संग्रहण एवं अन्य गैर कृषि कार्य कर रहे है। सामान्य ग्रामीण जीवन शैली एवं रोज की तरह घर के काम-काज खाना बनाना एवं कृषि कार्य में ही व्यस्त रहते थे। अपने लिए चाह कर भी समय नहीं निकाल पाते थे। घर की जिम्मेदारियों के बीच खुद की कुछ करने की चाह को दबा कर रख लेती थी कृषि पर आधारित होने के कारण आय का कोई दूसरा स्त्रोत नहीें होने के कारण आए दिन पैसों की आवश्यकता रहती थी। स्वयं सहायता समूह में जुड़ने से पहले प्राथमिक आजीविका कृषि एवं दैनिक मजदूरी करती थी जिससे कृषि से आय 23000 वार्षिक एवं मजदूरी से आय 16000 वार्षिक व अन्य से आय 12000 वार्षिक होता था। जिससे वे अपना परिवार का पालन पोषण करने व बच्चो की शिक्षा में पूरा पैसा खर्च कर देते थे।
          राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘‘बिहान‘‘ योजना अंतर्गत ग्राम पंचायतों में सी.आर.पी. राउण्ड पर आये दीदीयोें के द्वारा बिहान योजना के बारे में पूर्ण जानकारी दी गई। जिससे मैं भी समूह में जुड़ने के लिए इच्छा जाहिर की और मुझे गौरी महिला स्वयं सहायता समूह में सदस्य के रूप में जोड़ा गया। मैं स्वयं सहायता समूह में जुड़ने के बाद सी.आई.एफ. के रूप में 50000 रूपये एवं बैंक लिंकेज के रूप में 100000 रूपये लेकर मेरे द्वारा कृषि के साथ-साथ किराना दुकान किया गया और किराना प्रति दिवस 4600 का बिक्री हो जाता है। जिसमें मुझे प्रति दिवस 450 प्रति दिवस आय होता है। इस प्रकार समूह से जुड़ कर समूह की महिलाएं आजीविका गतिविधि अपनाकर आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर हो रही है। जिससे मैं अपने परिवार को अच्छे से चला पा रही हूं। अब वह अपने को आत्मनिर्भर एवं सशक्त महसूस कर रही है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here