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शहडोल“कागज़ों में स्वच्छता, ज़मीनी हकीकत बदहाल: शहडोल के ग्राम चितरांव में बना सामुदायिक शौचालय बना शोपीस”……….

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✍️ बेनी माधव कुशवाहा, जिला रिपोर्टर,…..

सालों से बंद पड़ा महिला-पुरुष शौचालय, ग्रामीणों में आक्रोश — 14वें व 15वें वित्त का पैसा कहां गया?
🟥 स्थान:
ग्राम पंचायत चितरांव
📍 जनपद पंचायत जयसिंहनगर, जिला शहडोल (मध्यप्रदेश)

🟥 मुख्य खबर:

मध्यप्रदेश के शहडोल जिले के जनपद पंचायत जयसिंहनगर अंतर्गत ग्राम पंचायत चितरांव में स्वच्छ भारत मिशन के तहत बनाए गए सामुदायिक स्वच्छता परिसर
(महिला-पुरुष शौचालय) की हालत बेहद चिंताजनक बनी हुई है।

ग्रामीणों के अनुसार, यह शौचालय निर्माण के बाद से ही आज तक शुरू नहीं हो पाया है।

लाखों रुपए खर्च होने के बावजूद यह केवल एक “शोपीस” बनकर रह गया है, जिसका उपयोग आज तक किसी ने नहीं किया।


🟥 ग्रामीणों का आरोप:

स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि

> “जब से शौचालय बना है, तब से बंद पड़ा है। कई बार सरपंच और सचिव से इसे चालू कराने की मांग की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।”

ग्रामीणों का कहना है कि शौचालय के रख-रखाव और संचालन के लिए मिलने वाली राशि का भी कोई उपयोग नहीं किया गया।

🟥 प्रशासन पर सवाल:

यह मामला सीधे तौर पर पंचायत व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है—

क्या 14वें और 15वें वित्त आयोग की राशि का सही उपयोग हुआ?

क्या ग्राम पंचायत स्तर पर विकास केवल कागज़ों तक सीमित है?

क्यों अब तक जिम्मेदार अधिकारियों ने निरीक्षण नहीं किया?

🟥 जिम्मेदार कौन?

इस पूरे मामले में

👉 मूलभूत सुविधाओं के लिए आने वाले फंड का उपयोग न होना लापरवाही या भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है।
—:

यह मामला केवल एक गांव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे सिस्टम पर सवाल खड़ा करता है—

क्या स्वच्छ भारत मिशन केवल दिखावा बनकर रह गया है?

क्या ग्रामीण क्षेत्रों में योजनाएं केवल फोटो और रिपोर्ट तक सीमित हैं?

आखिर क्यों जमीनी स्तर पर जवाबदेही तय नहीं हो रही?

🟥 प्रशासन से मांग:

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि—

✅ तत्काल जांच कराई जाए

✅ शौचालय को जल्द चालू कराया जाए

✅ फंड के उपयोग की पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए

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