खबर / नीलेश सोनी……….
ग्राम पंचायत ओदारी के धूम्मडाड रोड पर ‘विकास’ की मौत, एक दशक से जनता कराह रही!?
ग्राम पंचायत ओदारी, का धूम़्माडाड रोड ?
की हालत पिछले एक दशक से ऐसी हो गई है कि वह अब ‘सड़क’ कम और ‘खतरनाक दलदल’ ज़्यादा लगती है।
यह मात्र सड़क नहीं, बल्कि सरकारी उदासीनता, और भ्रष्टाचार का जीता-जागता स्मारक बन चुकी है।?
🔥 विकास के दावों की खुली पोल
जिस प्रदेश में ‘विकास’ के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, वहाँ इस सड़क की जर्जर स्थिति ?
सड़क पर गड्ढे नहीं, बल्कि गड्ढों में सड़क नज़र आती है। ये जानलेवा गड्ढे इतने गहरे हैं कि बारिश के दिनों में ये छोटी झील का रूप ले लेते हैं, जिससे आए दिन दुर्घटनाएं होती रहती हैं।?
* जर्जरता का स्तर: सड़क की गिट्टियाँ उखड़ चुकी हैं, डामर का नामोनिशान मिट चुका है। राहगीरों का चलना दूभर हो गया है।?
* दैनिक त्रासदी: स्थानीय निवासियों को प्रतिदिन धूल, मिट्टी और कीचड़ भरी इस सड़क से होकर गुज़रना पड़ता है।?
* स्वास्थ्य पर खतरा: उड़ती हुई धूल के कारण गाँव में श्वास संबंधी बीमारियाँ तेजी से फैल रही हैं।?

* जनप्रतिनिधि गायब: चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे करने वाले जनप्रतिनिधि और ग्राम पंचायत के अधिकारी इस समस्या पर मौनी बाबा बने बैठे हैं।?
*
> 📢 “यह केवल सड़क नहीं है, यह जनता के सब्र का इम्तिहान है। दस साल से गाँव वाले नरक झेल रहे हैं। प्रशासन वे बुनियादी सुविधा भी नहीं दे पा रहे हैं।”?
> — एक आक्रोशित स्थानीय निवासी
>
🤔 सवाल जो व्यवस्था से पूछना ज़रूरी है:
* आखिर इन वर्षों में विकास के लिए आया बजट कहाँ गया? क्या वह भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया?
* ग्राम पंचायत और संबंधित विभाग कुंभकर्णी नींद में क्यों सो रहा है,
* क्या अधिकारियों को जनता की तकलीफ से कोई सरोकार नहीं है, या वे केवल कागजों पर ही विकास दिखाते हैं?
अब देखना यह है कि बेसुध प्रशासन कब जागता है और ग्रामीणों को कब राहत मिलती है।??

