📝 *खबर (निलेश सोनी):
🚨 सोनहत। विकासखंड सोनहत स्थित कृषि विभाग के कार्यालय में इन दिनों व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय किसानों एवं सूत्रों के अनुसार वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारी प्रायः कार्यालय में उपस्थित नहीं रहते, जिससे पूरा कामकाज बाबू और दैनिक कर्मचारियों के भरोसे संचालित हो रहा है।
📌 बाबू के भरोसे कार्यालय संचालन
बताया जा रहा है कि विभागीय फाइलों से लेकर किसानों की योजनाओं तक की जिम्मेदारी एक बाबू पर केंद्रित है। आरोप है कि संबंधित बाबू का व्यवहार भी किसानों और कर्मचारियों के प्रति अहंकारी है तथा वह स्वयं को “ऊपर तक पहुंच” का दावा करते हुए निर्णयों में मनमानी करता है।
किसानों का कहना है कि जब अधिकारी ही उपलब्ध नहीं होंगे तो योजनाओं का लाभ समय पर कैसे मिलेगा?
🏢 कैंपस की स्थिति भी दयनीय
कार्यालय परिसर की साफ-सफाई को लेकर भी लापरवाही सामने आई है। परिसर में नियमित सफाई नहीं होती, जिससे अव्यवस्था का माहौल बना रहता है। दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के भरोसे व्यवस्था टिके होने से स्थायी सुधार नहीं हो पा रहा है।
⚖️ प्रशासनिक दृष्टि से सवाल
अधिकारी की नियमित उपस्थिति का अभाव
कार्यप्रणाली में पारदर्शिता की कमी
योजनाओं के क्रियान्वयन में संभावित देरी
परिसर रखरखाव में लापरवाही
इन बिंदुओं को लेकर अब उच्च अधिकारियों से जांच एवं आवश्यक प्रशासनिक कार्रवाई की मांग उठने लगी है।
🏛️ राजनीतिक एवं सामाजिक प्रतिक्रिया
क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों एवं सामाजिक संगठनों ने भी इस स्थिति पर चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि कृषि प्रधान क्षेत्र सोनहत में यदि कृषि विभाग ही निष्क्रिय रहेगा तो किसानों का नुकसान निश्चित है।
राजनीतिक दृष्टि से भी यह मुद्दा तूल पकड़ सकता है, क्योंकि किसानों से जुड़े विभाग की कार्यशैली सीधे जनभावनाओं से जुड़ी होती है।
—
📢 मांग
1. वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारी की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित की जाए।
2. कार्यालय व्यवस्था एवं साफ-सफाई में सुधार हो।
3. कार्यप्रणाली की निष्पक्ष जांच कर जवाबदेही तय की जाए।
अब देखना यह है कि प्रशासन इस गंभीर विषय पर कितनी शीघ्रता से संज्ञान लेता है और किसानों के हित में क्या कदम उठाए जाते हैं।

