बिहार की जीत का जश्न मनाने के नाम पर कुछ कार्यकर्ताओं द्वारा कुमार चौक पर भव्य आतिशबाज़ी की गई, जिसे बैकुण्ठपुर की जनता के सामने एक बड़े दिखावे के रूप में पेश किया गया। जिला मुख्यालय में भारतीय जनता पार्टी अंदरखाने स्पष्ट रूप से कई हिस्सों में बंटी नज़र आ रही है—दिल कहीं और, और ज़ुबान पर कुछ और, यही तस्वीर स्थानीय राजनीति का असली चेहरा उभार रही है।
कुमार चौक पर मिठाइयाँ बाँटकर जीत का स्वागत तो किया गया, पर बैकुण्ठपुर मुख्यालय में चर्चाओं का बाज़ार पहले से ज़्यादा गर्म है। हर कोई शहर को आगे बढ़ाने की बात तो करता है, लेकिन भीतरखाने राजनीतिक समीकरण बिल्कुल उलटे दिखाई दे रहे हैं। आरोप यह भी लग रहे हैं कि कांग्रेस के पार्षद रहकर कुछ लोग बीजेपी को समर्थन दे रहे हैं, और नगर पालिका अध्यक्ष की कुर्सी दिलवाकर जनता के साथ राजनीतिक धोखा कर रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर पालिका अब जनसेवा का केंद्र नहीं, बल्कि स्वार्थ का अड्डा बन चुका है। न तो अध्यक्ष किसी की सुनने को तैयार है और न ही सीएमओ। लोगों में खास नाराज़गी इस बात को लेकर भी है कि सीएमओ स्थानीय निवासी होते हुए भी व्यवस्था सुधारने की बजाए नगरपालिका में सुपरवाइज़रों की फौज खड़ी किए हुए हैं। ऊपर से वीडियोग्राफी दिखाकर हर काम को सिर्फ़ दिखावे का तमाशा बना दिया गया है, जिसके पीछे मोटी कमाई का खेल छिपा बताया जा रहा है।
बैकुण्ठपुर में जनता अब यह सवाल उठा रही है कि क्या बिहार चुनाव जीत का जश्न सिर्फ़ पर्दा था और असली खेल नगर पालिका के स्वार्थ की राजनीति? शहर की जनता जवाब चाहती है और बैकुण्ठपुर में सियासत का पारा लगातार चढ़ता जा रहा है।


